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विकास के दावों की खुली पोल: जर्जर स्कूल से निकले बच्चे, खेत के कच्चे मकान में लग रही पाठशाला

विकास के दावों की खुली पोल: जर्जर स्कूल से निकले बच्चे, खेत के कच्चे मकान में लग रही पाठशाला
दो महीने से भवनविहीन मासूमों का दर्द, बीजाढाना में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल; मरम्मत के लिए कई बार सूचना देने के दावे, अब तक नहीं हुई कार्रवाई

तामिया/छिंदवाड़ा | रामकुमार राजपूत की विशेष रिपोर्ट
छिंदवाड़ा। तामिया की खूबसूरत वादियों और विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सरकारी शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करती है। तामिया विकासखंड के ग्राम बीजाढाना में शासकीय प्राथमिक शाला का भवन जर्जर होने के बाद पिछले करीब दो महीने से बच्चों की पढ़ाई खेत में बने एक कच्चे मकान में संचालित होने का मामला सामने आया है। मासूम बच्चों को सुरक्षित छत के बजाय कच्चे मकान में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। ग्रामीणों और जनशिक्षक की ओर से भवन की समस्या को लेकर कई बार जानकारी देने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं होने का आरोप है।


जर्जर भवन से कच्चे मकान तक पहुंची पढ़ाई
ग्राम पंचायत चोपना के अंतर्गत आने वाले बीजाढाना में संचालित प्राथमिक शाला के पुराने भवन की हालत खराब बताई जा रही है। स्कूल में पढ़ा रहे अतिथि शिक्षकों के अनुसार भवन जर्जर हो चुका है और बच्चों को वहां बैठाना सुरक्षित नहीं माना गया। इसके बाद ग्रामीणों से चर्चा कर खेत में बने कच्चे मकान में स्कूल संचालित करने की व्यवस्था की गई।
तत्काल बच्चों को खतरे से बाहर निकालने के लिए की गई यह व्यवस्था अब करीब दो महीने बाद भी जारी होने का दावा है। सवाल यह है कि अस्थायी व्यवस्था को स्थायी समाधान में बदलने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।


दो महीने से इंतजार, जिम्मेदारों से जवाब मांग रहे ग्रामीण
स्कूल भवन की समस्या को लेकर ग्रामीणों और जनशिक्षक की ओर से कई बार अधिकारियों को जानकारी देने की बात कही गई है। जनशिक्षक दिलीप भारती के अनुसार भवन की समस्या से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ।


ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम सभा में ग्राम पंचायत चोपना के सचिव के समक्ष भी स्कूल भवन की मरम्मत का मुद्दा उठाया गया। इसके अलावा जनपद पंचायत के इंजीनियर राजिक खान को भी कई बार भवन की मरम्मत के संबंध में जानकारी देने और काम कराने की मांग किए जाने का दावा है। इसके बावजूद अब तक काम शुरू नहीं होने की बात सामने आ रही है।
यदि इन दावों की पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड से होती है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर स्कूल भवन की समस्या किस स्तर पर अटकी हुई है।
योजनाओं के बजट बनाम बच्चों की जमीनी हकीकत
सरकार दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा एवं बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। प्रधानमंत्री जनमन योजना सहित अनेक योजनाओं के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के विकास पर जोर दिया जा रहा है। लेकिन बीजाढाना की तस्वीर इन दावों के बीच एक गंभीर सवाल खड़ा करती है।
एक ओर विकास योजनाओं और सुविधाओं की बात होती है, वहीं दूसरी ओर गांव के बच्चों को सुरक्षित स्कूल भवन तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। क्या दूरस्थ गांव में रहने वाले बच्चों का शिक्षा का अधिकार शहरों में पढ़ने वाले बच्चों से कम है? क्या कम संख्या में बच्चे होने के कारण उनकी सुरक्षा और सुविधाओं को नजरअंदाज किया जा सकता है?


कच्चे मकान में पढ़ाई, बारिश और सुरक्षा का सवाल
खेत में बने कच्चे मकान में स्कूल संचालित होने से बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई की व्यवस्था को लेकर कई सवाल सामने हैं। बारिश के मौसम में कच्चे मकान की स्थिति कैसी रहती है? तेज बारिश और आंधी के दौरान बच्चों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा रही है? बैठने, रोशनी और अन्य आवश्यक शैक्षणिक सुविधाओं की क्या व्यवस्था है?
इन सवालों का जवाब शिक्षा विभाग और प्रशासन को देना होगा। यदि पुराना भवन जर्जर है तो उसकी तकनीकी जांच कराई जाना जरूरी है। भवन मरम्मत योग्य है तो मरम्मत की प्रक्रिया तत्काल शुरू होनी चाहिए। यदि भवन पूरी तरह अनुपयोगी है तो नए भवन की प्रक्रिया और तब तक सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था पर स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए।


पर्यटन विकास के बीच गांव के बच्चों की अनदेखी क्यों?
तामिया को पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की बात लंबे समय से होती रही है। क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन संभावनाओं को देखते हुए विकास कार्यों पर जोर दिया जाता है। लेकिन बीजाढाना जैसे गांव की यह तस्वीर सवाल करती है कि विकास की योजनाओं का लाभ बच्चों तक कब पहुंचेगा।
पर्यटन के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और बुनियादी सुविधाएं भी विकास का महत्वपूर्ण आधार हैं। गांव के बच्चों को सुरक्षित स्कूल भवन उपलब्ध कराना किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं, बल्कि बुनियादी आवश्यकता है।


प्रशासन के सामने अब ये सवाल
बीजाढाना प्राथमिक शाला का भवन जर्जर होने की तकनीकी जांच कब कराई गई?
करीब दो महीने से कच्चे मकान में स्कूल चलने की जानकारी शिक्षा विभाग को कब मिली?
ग्रामीणों और जनशिक्षक द्वारा शिकायत किए जाने के दावों पर क्या कार्रवाई हुई?
ग्राम पंचायत चोपना और जनपद पंचायत के स्तर पर भवन मरम्मत की क्या प्रक्रिया अपनाई गई?
स्कूल भवन की मरम्मत कब तक होगी और तब तक बच्चों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक भवन की व्यवस्था क्या है?

क्या शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया है?
बच्चों को चाहिए सुरक्षित छत, सिर्फ विकास के दावे नहीं
बीजाढाना के बच्चे कोई विशेष सुविधा नहीं मांग रहे हैं। वे सिर्फ पढ़ने के लिए एक सुरक्षित छत चाहते हैं। उनके माता-पिता चाहते हैं कि बच्चे शिक्षा हासिल कर अपना भविष्य बेहतर बना सकें। ऐसे में जर्जर भवन से निकलकर खेत के कच्चे मकान में पढ़ाई करने की तस्वीर शिक्षा व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करती है।
अब प्रशासन को चाहिए कि मामले का तत्काल संज्ञान लेकर मौके का निरीक्षण कराए, भवन की तकनीकी जांच करवाए और बच्चों के लिए सुरक्षित स्कूल भवन की व्यवस्था सुनिश्चित करे। ग्रामीणों और जनशिक्षक की ओर से बार-बार जानकारी दिए जाने के दावों की भी जांच होनी चाहिए।
बीजाढाना की तस्वीर अब सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर सामने रख रही है। विकास तभी सार्थक माना जाएगा, जब उसकी रोशनी गांव के उन बच्चों तक पहुंचे, जो आज भी सुरक्षित स्कूल भवन का इंतजार कर रहे हैं।