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मरम्मत पर लाखों खर्च, फिर भी खंडहर में रहने को मजबूर आदिवासी बच्चे!

मरम्मत पर लाखों खर्च, फिर भी खंडहर में रहने को मजबूर आदिवासी बच्चे!


रिपोर्ट -रामकुमार राजपूत

मोबाइल -8989115284
छिंदवाड़ा (परासिया) विकासखंड परासिया के आदिवासी बालक आश्रम अंबाडा में मरम्मत कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पिछले लगभग दो वर्षों में आश्रम की मरम्मत एवं अन्य कार्यों के नाम पर करीब 50 लाख रुपये से अधिक की राशि ठेकेदारों को भुगतान की जा चुकी है, लेकिन जमीनी स्तर पर आश्रम की हालत अब भी जर्जर बनी हुई है। और दिनांक 27/07/2026को 1125479 का और भुगतान ठेकेदार असलाम खान के नाम पर कर दिया गया ।


शिकायत के अनुसार, भवन के कई हिस्से आज भी खस्ताहाल हैं। छात्र असुरक्षित एवं जर्जर कमरों में रहने और पढ़ाई करने को मजबूर हैं। आरोप है कि मरम्मत पर भारी राशि खर्च दिखाने के बावजूद आश्रम की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।


शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि जनजातीय कार्य विभाग के कुछ अधिकारियों, सहायक यंत्री, संबंधित अधिकारियों तथा ठेकेदारों की मिलीभगत से कथित रूप से फर्जी बिलों के आधार पर भुगतान किया गया। उनका दावा है कि जिन कार्यों का भुगतान किया गया, उनमें से कई कार्य या तो अधूरे हैं या धरातल पर दिखाई ही नहीं देते।


शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इससे पहले भी आश्रम की मरम्मत और बाउंड्री वॉल निर्माण के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान किया गया था, लेकिन आज भी आश्रम परिसर की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि भुगतान के अनुरूप कार्य हुए होते तो बच्चों को जर्जर भवन में रहने की नौबत नहीं आती।
भौतिक सत्यापन की मांग
शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराकर सभी भुगतान, माप पुस्तिका (एमबी), तकनीकी स्वीकृति, बिल-वाउचर तथा कार्यों का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच होने पर वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी।
विभाग का पक्ष
इन आरोपों के संबंध में संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। विभाग का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।