मिड-डे मील में कहीं कीड़े तो कहीं सड़े आलू!
मानेगांव स्कूल में बच्चों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल, शिकायत पर धमकी देने का दावा
ग्रामीण ने पुलिस के सामने दिखाई भोजन की स्थिति, वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने गठित की जांच कमेटी
छिंदवाड़ा। जिले के मानेगांव स्थित शासकीय माध्यमिक शाला में विद्यार्थियों को उपलब्ध कराए जाने वाले मध्यान्ह भोजन (मिड-डे मील) की गुणवत्ता को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। शिकायतकर्ताओं की ओर से भोजन में कथित तौर पर कीड़े मिलने, सड़े हुए आलू इस्तेमाल किए जाने और दाल-सब्जी की गुणवत्ता खराब होने के आरोप लगाए गए हैं। मामले से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने संज्ञान लेते हुए जांच कमेटी गठित की है।

मामले में शिकायतकर्ताओं की ओर से यह दावा भी किया गया है कि भोजन की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाने पर स्कूल की प्रधानपाठक द्वारा शिकायतकर्ता को कार्रवाई अथवा केस की धमकी दी गई। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
स्कूल पहुंचे ग्रामीण तो बुला ली गई पुलिस
शिकायत के अनुसार, 9 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 1 बजे वरिष्ठ नागरिकों, महिला सरपंच, जनपद सदस्य और मीडिया से जुड़े लोगों ने स्कूल पहुंचकर बच्चों के लिए तैयार किए गए मध्यान्ह भोजन की स्थिति देखी। भोजन की गुणवत्ता और साफ-सफाई को लेकर स्कूल प्रबंधन से सवाल किए गए।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा पुलिस को भी मौके पर बुलाया गया। ग्रामीण ने पुलिस कर्मचारियों की मौजूदगी में ही भोजन की गुणवत्ता को लेकर अपनी आपत्ति सामने रखी और कथित भोजन सामग्री दिखाई। इस पूरे घटनाक्रम से संबंधित वीडियो भी सामने आया है।
कहीं कीड़े, कहीं सड़े आलू के आरोप
शिकायत में भोजन की गुणवत्ता को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि भोजन में कथित तौर पर कीड़े पाए जाने और सड़े हुए आलू के इस्तेमाल जैसी स्थिति सामने आई। दाल और सब्जी की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि समाचार पत्र द्वारा नहीं की गई है। इसलिए मामले की वास्तविकता जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।
पर्याप्त खाद्य सामग्री उपलब्ध नहीं कराने का भी आरोप
शिकायतकर्ताओं की ओर से भोजन तैयार करने वाली महिला कर्मचारी से बातचीत का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया है कि बच्चों के लिए भोजन तैयार करने के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जाती। सामग्री की मांग करने पर कथित रूप से नाराजगी जताए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है।
यदि खाद्यान्न अथवा भोजन सामग्री की उपलब्धता में वास्तव में कमी है, तो यह जांच का महत्वपूर्ण विषय होगा कि बच्चों के लिए निर्धारित भोजन की मात्रा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किस स्तर पर है।

स्कूल की राशि के उपयोग पर भी उठे सवाल
शिकायत में शैक्षणिक सत्र 2025-26 में करीब एक लाख रुपये की राशि का उल्लेख करते हुए उसके उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि लगभग 20 हजार रुपये चॉक-बोर्ड सहित अन्य कार्यों में खर्च किए गए, जबकि शेष राशि के उपयोग को लेकर स्पष्टता की आवश्यकता है।
इस संबंध में संबंधित अभिलेख, बिल-वाउचर और भुगतान विवरण की जांच से ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

स्कूल परिसर की व्यवस्था पर भी शिकायत
शिकायत में स्कूल परिसर में आवारा कुत्तों के पहुंचने और बच्चों से पढ़ाई के अलावा अन्य कार्य कराए जाने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
शिकायतकर्ता ने इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
वीडियो के बाद विभाग ने गठित की जांच कमेटी
मामले से संबंधित वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग द्वारा जांच कमेटी गठित किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब जांच में यह देखा जाना महत्वपूर्ण होगा कि स्कूल में बच्चों को उपलब्ध कराए जा रहे भोजन की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप थी या नहीं।
जांच के दायरे में ये बिंदु महत्वपूर्ण
- मध्यान्ह भोजन में इस्तेमाल खाद्य सामग्री की गुणवत्ता।
- खाद्यान्न एवं अन्य सामग्री का उपलब्ध स्टॉक।
- भोजन तैयार करने और परोसने की व्यवस्था।
- भोजन में कथित कीड़े अथवा खराब सब्जी मिलने की शिकायत।
- खाद्यान्न वितरण एवं स्टॉक रजिस्टर का सत्यापन।
- वर्ष 2025-26 में स्कूल को प्राप्त राशि और उसके खर्च का रिकॉर्ड।
- स्कूल परिसर की साफ-सफाई एवं सुरक्षा व्यवस्था।
- शिकायतकर्ताओं को कथित धमकी दिए जाने के आरोप।
- बच्चों से पढ़ाई के अतिरिक्त कार्य कराए जाने की शिकायत।
बच्चों के भोजन का मामला, जांच में पारदर्शिता जरूरी
मध्यान्ह भोजन सीधे स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ा विषय है। ऐसे में मानेगांव स्कूल की शिकायत को केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रखने के बजाय मौके पर भोजन के नमूने, खाद्य सामग्री, स्टॉक रजिस्टर, बिल-वाउचर और संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाना जरूरी है।
यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप तथ्यहीन पाए जाते हैं, तो जांच रिपोर्ट से स्थिति स्पष्ट होना भी उतना ही जरूरी है।

विभाग एवं स्कूल प्रबंधन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
नोट: इस समाचार में उल्लेखित आरोप शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि समाचार पत्र द्वारा नहीं की गई है। वास्तविक स्थिति संबंधित विभाग की जांच एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर स्पष्ट होगी।








