ठेकेदार असलाम खान एवं सहायक यंत्री दीपक सरेयाम की मिलीभगत से परासिया ब्लॉक में छात्रावास मरम्मत के नाम पर फर्जी तरीके से निकल रहे लाखों रुपए की राशि..!
कागज़ों में पुताई-मरम्मत, हकीकत में नया भवन!
पलटवाड़ा आदिवासी सीनियर बालक छात्रावास में 4.45 लाख के भुगतान पर सवाल..!
रिपोर्ट -रामकुमार राजपूत मोबाइल -8989115284,8839760279
छिंदवाड़ा/पलटवाड़ा। जनजातीय कार्य विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पलटवाड़ा स्थित आदिवासी सीनियर बालक छात्रावास में पुताई एवं मरम्मत कार्य के नाम पर 4,45,965 रुपये निकाले जाने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि छात्रावास का भवन नया बना है और इसी वर्ष छात्रों को उसमें शिफ्ट किया गया है, ऐसे में पुताई और मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च दिखाया जाना गंभीर वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है।

शिकायत के अनुसार यह भुगतान विभागीय अधिकारियों, तकनीकी अमले और ठेकेदार की कथित मिलीभगत से किया गया। आरोप है कि फर्जी बिलों के आधार पर राशि आहरित कर भुगतान किया गया, जबकि स्थल पर संबंधित कार्य दिखाई नहीं देता।

अधीक्षक का कथित बयान: “कोई पुताई-मरम्मत नहीं हुई”
मामले में छात्रावास अधीक्षक से संपर्क किए जाने पर उन्होंने कथित रूप से कहा कि छात्रावास में कोई भी पुताई या मरम्मत कार्य नहीं कराया गया, क्योंकि भवन नया निर्मित है। अधीक्षक ने यह भी कहा कि विभागीय भुगतान और टेंडर संबंधी प्रक्रिया सहायक आयुक्त कार्यालय स्तर से संचालित होती है और उन्हें इस भुगतान की जानकारी नहीं है।
भुगतान प्रक्रिया पर उठे सवाल
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि हाल के महीनों में छात्रावासों में मरम्मत कार्यों के नाम पर बड़ी राशि स्वीकृत और आहरित किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। पलटवाड़ा प्रकरण में भी यह मांग उठ रही है कि:
स्वीकृति आदेश सार्वजनिक किए जाएं,
“यदि भवन नया है तो मरम्मत किस बात की?”
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भवन हाल ही में निर्मित हुआ और उसी वर्ष छात्रों को उसमें स्थानांतरित किया गया, तब लाखों रुपये की पुताई एवं मरम्मत स्वाभाविक नहीं लगती। लोगों ने इसे “कागज़ों में काम, जमीन पर शून्य” बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
पहले भी लगे हैं अनियमितता के आरोप
जनजातीय कार्य विभाग पर पूर्व में भी छात्रावासों और निर्माण कार्यों से जुड़े भुगतान मामलों में अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं। पलटवाड़ा का मामला सामने आने के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर फिर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
जांच की मांग तेज
सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने कलेक्टर, संभागीय आयुक्त तथा जनजातीय कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर आपराधिक एवं विभागीय कार्रवाई की जाए।
(नोट: यह समाचार स्थानीय स्तर पर प्राप्त शिकायतों और संबंधित पक्षों से हुई बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि शेष है। संबंधित अधिकारियों का विस्तृत पक्ष प्राप्त होने पर प्रकाशित किया जाएगा।)
माप पुस्तिका (एमबी) की जांच हो,
बिल-वाउचर और भुगतान अभिलेखों का परीक्षण किया जाए,
तथा स्वतंत्र तकनीकी टीम से भौतिक सत्यापन कराया जाए।








