मेढ़-नाली पद्धति बनी किसानों की ताकत, भारी बारिश में भी लहलहा रही मक्का की फसल..
छिन्दवाड़ा/ बदलते मौसम और अनियमित वर्षा के दौर में जहां जलभराव किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है, वहीं कृषि विभाग एवं आत्मा परियोजना द्वारा प्रोत्साहित की जा रही मेढ़-नाली (रिज एवं फरो) पद्धति किसानों के लिए संजीवनी साबित हो रही है। इस वैज्ञानिक तकनीक को अपनाकर जिले के किसान न केवल फसल को जलभराव से बचा रहे हैं, बल्कि बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ भी प्राप्त कर रहे हैं।

जिले के विकासखंड मोहखेड़ के ग्राम नए गांव उदासी (राजेगांव) के प्रगतिशील किसान श्री घनसू यादव इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल हैं। उन्होंने खरीफ 2026 में अपने खेत में मक्का की बुवाई मेढ़-नाली पद्धति से की। वर्तमान में क्षेत्र में लगातार हो रही भारी वर्षा के बावजूद उनकी मक्का की फसल पूरी तरह स्वस्थ, हरी-भरी और संतुलित वृद्धि करती दिखाई
दे रही है।
फसल निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट रूप से देखा गया कि खेत की नालियों में पर्याप्त पानी भरा होने के बावजूद फसल पर जलभराव का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है। मेढ़ों पर बोई गई फसल की जड़ों तक अतिरिक्त पानी नहीं पहुंचता, बल्कि नालियों में एकत्र हो जाता है। इससे पौधों की जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती रहती है और फसल सुरक्षित रहती है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मेढ़-नाली पद्धति मक्का के साथ-साथ सोयाबीन, कपास एवं तुअर जैसी फसलों के लिए भी अत्यंत उपयोगी है। सामान्यतः जलभराव की स्थिति में फसल पीली पड़ जाती है और किसानों को अतिरिक्त उर्वरकों का उपयोग करना पड़ता है, लेकिन इस तकनीक से ऐसी समस्याएं काफी हद तक कम हो जाती हैं। यही कारण है कि जिले के लगभग 90 प्रतिशत किसान विभिन्न कृषि यंत्रों की सहायता से रिज एवं फरो पद्धति को अपना चुके हैं।
यह तकनीक केवल अधिक वर्षा में ही लाभकारी नहीं है, बल्कि कम वर्षा की स्थिति में भी नालियों में संचित नमी फसल को सहारा देती है। इससे पौधों की वृद्धि बेहतर होती है, उर्वरकों का उपयोग अधिक प्रभावी बनता है तथा उत्पादन एवं गुणवत्ता दोनों में वृद्धि होती है।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में मेढ़-नाली पद्धति किसानों के लिए सुरक्षित और टिकाऊ खेती का प्रभावी विकल्प बनकर उभरी है। मोहखेड़ के किसान श्री घनसू यादव की सफल फसल यह संदेश दे रही है कि वैज्ञानिक खेती की आधुनिक तकनीकों को अपनाकर विपरीत परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

फसल निरीक्षण के दौरान उप संचालक कृषि श्री मोरिस नाथ, आत्मा परियोजना के परियोजना संचालक श्री धीरज ठाकुर, अनुविभागीय कृषि अधिकारी श्री नीलकंठ पटवारी, सहायक संचालक श्री दीपक चौरसिया एवं ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर सुश्री प्रिया कराड़े उपस्थित थे। अधिकारियों ने किसानों से वैज्ञानिक खेती की तकनीकों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने का आह्वान किया।








