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एक शिक्षक के भरोसे दो ब्लॉक! जनजाति कार्य विभाग के फैसले पर उठे गंभीर सवाल, क्या आदिवासी शिक्षा भगवान भरोसे?

एक शिक्षक के भरोसे दो ब्लॉक! जनजाति कार्य विभाग के फैसले पर उठे गंभीर सवाल, क्या आदिवासी शिक्षा भगवान भरोसे?

माध्यमिक उच्च शिक्षक को तामिया बीआरसी और हर्रई बीईओ का अतिरिक्त प्रभार, निरीक्षण व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल!
छिंदवाड़ा। जनजाति कार्य विभाग का एक प्रशासनिक निर्णय अब सवालों के घेरे में है। विभाग द्वारा माध्यमिक शिक्षक किशोर कुमार पांडे को तामिया बीआरसी और हर्रई बीईओ का अतिरिक्त प्रभार सौंपे जाने के बाद शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई प्रश्न उठ रहे हैं। शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि दोनों पद पूर्णकालिक जिम्मेदारियों वाले हैं, ऐसे में एक ही व्यक्ति दोनों स्थानों की जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से कैसे निभा पाएगा?
आलोचकों का कहना है कि यदि ब्लॉक स्तर पर निरीक्षण, मॉनिटरिंग और शैक्षणिक समीक्षा नियमित नहीं होगी, तो सबसे अधिक नुकसान आदिवासी क्षेत्र के विद्यार्थियों को होगा। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कई स्कूलों में निरीक्षण की कमी के कारण शैक्षणिक गतिविधियों पर अपेक्षित निगरानी नहीं हो पा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या विभाग में अधिकारियों की इतनी कमी है कि दो महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व एक ही शिक्षक को सौंपने पड़े? यदि यह केवल अस्थायी व्यवस्था है, तो इसे कब तक जारी रखा जाएगा और इसका शिक्षा व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बीईओ और बीआरसी दोनों पदों की भूमिका अलग-अलग है और दोनों के लिए पर्याप्त समय एवं क्षेत्रीय उपस्थिति आवश्यक होती है। ऐसे में एक व्यक्ति पर दोहरी जिम्मेदारी डालना प्रशासनिक दक्षता पर भी प्रश्न खड़े करता है।
अब जनजाति कार्य विभाग से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह इस व्यवस्था के औचित्य पर स्पष्ट जवाब दे और यह बताए कि आदिवासी अंचलों में शिक्षा की गुणवत्ता तथा विद्यालयों के नियमित निरीक्षण को सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था की गई है।
नोट: यह समाचार उपलब्ध प्रशासनिक जानकारी तथा स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों के आधार पर तैयार किया गया है। संबंधित विभाग या अधिकारी का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

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