किसानों का आरोप: कीटनाशक दुकानों पर नियमों की अनदेखी, कृषि विभाग की निगरानी पर उठे सवाल!
छिंदवाड़ा (चौरई) खरीफ सीजन के बीच चौरई विकासखंड में कीटनाशक एवं खरपतवारनाशी दवाओं की बिक्री को लेकर किसानों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। किसानों का आरोप है कि कई दुकानों पर निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि दवा विक्रेता विशेषज्ञ की अनुपस्थिति में कर्मचारियों के भरोसे दुकानें संचालित कर रहे हैं, जिससे किसानों को उचित सलाह नहीं मिल पा रही है।
किसानों के अनुसार, कई दुकानों पर मांगने के बावजूद दवाओं का पक्का बिल नहीं दिया जाता। उनका कहना है कि बिना बिल के दवा खरीदने पर भविष्य में शिकायत या मुआवजे की स्थिति में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार आवश्यकता और फसल के अनुरूप सलाह देने के बजाय मनमर्जी से दवाएं बेच दी जाती हैं। आज चौरई क्षेत्र की गांव-गांव कस्बे कस्बे में कीटनाशनों की दुकान संचालित हो रही है, लेकिन कृषि विभाग के द्वारा उनकी नियमित जांच नहीं होती हैं।
जानकारों का कहना है कि यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह न केवल किसानों की आर्थिक हानि का कारण बन सकता है, बल्कि फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने कृषि विभाग से नियमित निरीक्षण कर नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की है।
स्थानीय किसानों का आरोप है कि चौरई विकासखंड में कृषि विभाग की निगरानी अपेक्षित स्तर पर नहीं दिख रही है। उनका कहना है कि यदि समय-समय पर दुकानों की जांच हो, लाइसेंसधारी विशेषज्ञ की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और बिल जारी करने के नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए तो ऐसी शिकायतों में कमी आ सकती है।
बड़ा सवाल:
यदि किसानों के आरोप सही हैं, तो क्या कृषि विभाग की नियमित जांच हो रही है? क्या बिना विशेषज्ञ की मौजूदगी के कीटनाशक दवाओं की बिक्री नियमों के अनुरूप है? और किसानों को पक्का बिल देने के नियमों का पालन आखिर कौन सुनिश्चित करेगा?
(नोट: यह समाचार किसानों द्वारा लगाए गए आरोपों और स्थानीय स्तर पर उठाई जा रही शिकायतों पर आधारित है। संबंधित पक्ष एवं कृषि विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)**








