निर्माण स्थलों पर बचपन मजदूरी की धूल में, शिक्षा अब भी दूर; श्रम निरीक्षक ने अभिभावकों को किया जागरूक
पांढुर्णा। एक ओर सरकार हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ने और आंगनवाड़ी सेवाओं का लाभ दिलाने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर निर्माण स्थलों पर काम करने वाले श्रमिकों के बच्चे आज भी शिक्षा और पोषण जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित नजर आ रहे हैं। रोजी-रोटी की मजबूरी में अधिकांश निर्माण श्रमिक दूसरे शहरों में काम करने चले जाते हैं और अपने छोटे बच्चों को भी साथ ले जाते हैं। ऐसे में न तो बच्चों की नियमित पढ़ाई हो पाती है और न ही वे आंगनवाड़ी की सुविधाओं का लाभ ले पाते हैं।

इसी स्थिति को देखते हुए सोमवार को पांढुर्णा जिले में श्रम विभाग की पहल के तहत श्रम निरीक्षक निर्माणाधीन स्थल पर पहुंचे। उन्होंने श्रमिकों से संवाद कर उनके बच्चों को नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र से जोड़ने की अपील की तथा समझाया कि प्रारंभिक शिक्षा, पोषण और टीकाकरण बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव हैं।

श्रम निरीक्षक ने अभिभावकों को बताया कि बच्चों को आंगनवाड़ी से जोड़ने से उन्हें पोषण आहार, प्रारंभिक शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि मजदूरी के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा और भविष्य पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।
हालांकि यह पहल सराहनीय है, लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम है कि जब हर वर्ष हजारों प्रवासी निर्माण श्रमिक अपने परिवार सहित पलायन करते हैं, तब उनके बच्चों की शिक्षा की निरंतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए स्थायी और प्रभावी तंत्र कब विकसित होगा। केवल समझाइश से नहीं, बल्कि लगातार निगरानी और समन्वित प्रयासों से ही इन बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।








