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आखिर… कैसे स्कूल चलें हम…?

आखिर… कैसे स्कूल चलें हम…?
सिवनी। जिला मुख्यालय से करीब 8 किलोमीटर दूर कंडीपार स्थित नवीन विद्यालय में स्कूल शिफ्ट करने की प्रशासनिक तैयारी शुरू हो गई है। लेकिन इस निर्णय ने हजारों छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि नए विद्यालय तक पहुंचने के लिए नियमित बस परिवहन सेवा उपलब्ध नहीं है।
अभिभावकों का कहना है कि यदि बिना परिवहन व्यवस्था के स्कूल स्थानांतरित किया गया, तो ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। कई विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन 8 किलोमीटर दूर आना-जाना मुश्किल होगा, जिससे उनके स्कूल छोड़ने का खतरा भी बढ़ सकता है।


अभिभावकों ने यह भी चिंता जताई कि नया विद्यालय अपेक्षाकृत निर्जन क्षेत्र में है। ऐसे में विशेषकर छात्राओं की सुरक्षा, आने-जाने के दौरान होने वाली संभावित घटनाओं और आपातकालीन परिस्थितियों को लेकर परिवार चिंतित हैं। उनका कहना है कि पर्याप्त सुरक्षा और परिवहन के बिना बच्चों को वहां भेजना जोखिम भरा होगा।
इस मुद्दे को लेकर अभिभावकों ने सिवनी विधायक से मुलाकात कर अपनी समस्याओं से अवगत कराया और मांग की कि विद्यालय शिफ्ट करने से पहले नियमित बस सेवा, सुरक्षित परिवहन तथा आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।


अभिभावकों का कहना है कि सरकार एक ओर शिक्षा को बढ़ावा देने और हर बच्चे को स्कूल पहुंचाने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर यदि बुनियादी परिवहन जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं, तो ये दावे सवालों के घेरे में आ जाते हैं।
अब सभी की निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर हैं कि वे विद्यार्थियों के हित में क्या निर्णय लेते हैं। अभिभावकों की स्पष्ट मांग है कि पहले सुरक्षित और सुगम परिवहन की व्यवस्था की जाए, उसके बाद ही विद्यालय का स्थानांतरण किया जाए।
सवाल वही है— “आखिर… कैसे स्कूल चलें हम…?”