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बिना निर्माण के लाखों का भुगतान? बिछुआ नगर परिषद में स्वागत द्वार को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप..

बिना निर्माण के लाखों का भुगतान? बिछुआ नगर परिषद में स्वागत द्वार को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप
छिंदवाड़ा । बिछुआ नगर परिषद में स्वागत द्वार निर्माण कार्य को लेकर वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही ठेकेदार को लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया, जिससे तत्कालीन मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) सहित कुछ जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, विशेष निधि मद से उभेगांव और उमरानाला मार्ग पर दो स्वागत द्वारों के निर्माण के लिए करीब 16.98 लाख रुपये की स्वीकृति मिली थी। नियमों के अनुसार पहले निर्माण कार्य पूरा होना था, उसके बाद संबंधित फर्म को भुगतान किया जाना था। लेकिन आरोप है कि तत्कालीन सीएमओ आशीष मेरावी के स्थानांतरण के दिन ही श्रीराम इंटरप्राइजेज, भोपाल को 13 लाख रुपये से अधिक का भुगतान कर दिया गया। बताया जा रहा है कि भुगतान के बाद उसी दिन सीएमओ कार्यमुक्त भी हो गए।


स्थानीय लोगों का कहना है कि अब तक दोनों स्थानों पर स्वागत द्वार का निर्माण नहीं हुआ है। मामला चर्चा में आने के बाद संबंधित स्थल पर निर्माण सामग्री पहुंचाई गई है, जिससे भुगतान को लेकर उठ रहे सवाल और गहरे हो गए हैं।
अध्यक्ष और इंजीनियर ने क्या कहा?
नगर परिषद अध्यक्ष रामचंद बोबड़े ने कहा कि स्वागत द्वार निर्माण की पूरी राशि का भुगतान नहीं किया गया है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद ही शेष भुगतान किया जाएगा।
वहीं नगर परिषद के इंजीनियर संदीप मरकाम ने बताया कि स्वागत द्वार के लिए सामग्री आ चुकी है और जल्द निर्माण शुरू होगा। उन्होंने स्वीकार किया कि ठेकेदार को कुछ अधिक भुगतान किया गया है, लेकिन पूरी राशि का भुगतान नहीं हुआ है।
आंदोलन की चेतावनी
विधायक प्रतिनिधि सुनील साहू ने आरोप लगाया कि नगर परिषद में कमीशनखोरी के चलते नियमों की अनदेखी कर निर्माण से पहले ही भुगतान कर दिया गया। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
(नोट: यह समाचार संबंधित पक्षों द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध बयानों पर आधारित है। यदि नगर परिषद या संबंधित अधिकारियों का विस्तृत पक्ष अथवा जांच रिपोर्ट सामने आती है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।)**