मानसून पर मौसम की मार, सूखे जून ने बढ़ाई किसानों की चिंता
देश में सामान्य से 42% कम बारिश दर्ज, 126 वर्षों के इतिहास में दूसरा सबसे सूखा जून; खेत तैयार, लेकिन आसमान से नहीं बरस रही राहत
छिंदवाड़ा-देशभर में मानसून की सुस्त चाल ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 21 जून तक देश में सामान्य से करीब 42 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे यह जून पिछले 126 वर्षों में दूसरा सबसे सूखा जून साबित हो रहा है। मध्य भारत सहित कई राज्यों में किसान बारिश के इंतजार में आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश किसानों ने बुवाई की तैयारियां पूरी कर ली हैं। खेतों की जुताई और खाद का प्रबंधन हो चुका है, लेकिन पर्याप्त वर्षा नहीं होने से बोवनी का काम प्रभावित हो रहा है। यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों के उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम सक्रिय होने से आने वाले दिनों में मानसून को गति मिल सकती है। पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि मध्य प्रदेश समेत मध्य भारत के कई हिस्सों में भी बारिश की संभावना जताई गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में किसान मृग नक्षत्र बीतने के बाद भी अच्छी बारिश न होने से चिंतित हैं। कई इलाकों में कुएं, तालाब और जलस्रोत अभी भी पर्याप्त नहीं भर पाए हैं। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में बारिश की देरी का सीधा असर किसानों और ग्रामीण बाजारों पर दिखाई देने लगा है।
किसानों की उम्मीदें अब अगले कुछ दिनों पर टिकी हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि यदि मानसून की रफ्तार बढ़ती है तो जून के अंतिम सप्ताह में कई राज्यों को राहत मिल सकती है।
कैप्शन:
“खेत तैयार, बीज तैयार, लेकिन बारिश का इंतजार—सूखे जून ने किसानों की बढ़ाई चिंता।”








