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देश के लिए मिसाल बना देवगढ़: महाराष्ट्र से आई टीम ने सीखे होम स्टे और अतिथि सत्कार के गुर

देश के लिए मिसाल बना देवगढ़: महाराष्ट्र से आई टीम ने सीखे होम स्टे और अतिथि सत्कार के गुर
छिंदवाड़ा का पर्यटन ग्राम बना ग्रामीण पर्यटन का मॉडल, देशभर में गूंज रही सफलता की कहानी

छिंदवाड़ा। कभी अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए पहचाना जाने वाला पर्यटन ग्राम देवगढ़ आज ग्रामीण पर्यटन और होम स्टे मॉडल की सफलता का राष्ट्रीय उदाहरण बन चुका है। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड की पहल और स्थानीय ग्रामीणों की मेहनत ने देवगढ़ को ऐसी पहचान दिलाई है कि अब दूसरे राज्यों के लोग यहां आकर सीखने लगे हैं कि पर्यटन के जरिए गांवों की तस्वीर और तकदीर कैसे बदली जा सकती है।
इसी कड़ी में महाराष्ट्र के नासिक, ठाणे, गोंदिया, गड़चिरोली और अहिल्यानगर जिलों से 33 सदस्यीय अध्ययन दल दो दिवसीय भ्रमण पर देवगढ़ पहुंचा। दल का उद्देश्य यहां संचालित होम स्टे परियोजना, अतिथि सत्कार और ग्रामीण पर्यटन गतिविधियों का अध्ययन करना था।
जब गांव बना पर्यटन विश्वविद्यालय
दो दिनों तक अध्ययन दल ने देवगढ़ के होम स्टे में रहकर न केवल व्यवस्थाओं को करीब से देखा, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी परिवारों के जीवन, संस्कृति और आतिथ्य का भी अनुभव किया। ऐतिहासिक किला, प्राचीन बावड़ियां, स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक वातावरण ने मेहमानों को प्रभावित किया।
अध्ययन दल ने माना कि देवगढ़ में पर्यटन केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि सामुदायिक विकास का सशक्त माध्यम बन गया है। यहां पूरा परिवार पर्यटन गतिविधियों में सहभागी बनकर आर्थिक और सामाजिक बदलाव की नई कहानी लिख रहा है।
मध्यप्रदेश मॉडल की देशभर में चर्चा
मध्यप्रदेश टूरिज्म Board की होम स्टे परियोजना का सफल क्रियान्वयन छिंदवाड़ा जिले में देखने को मिल रहा है। इसी सफलता को समझने के लिए महाराष्ट्र के शबरी आदिवासी वित्त एवं विकास महामंडल का दल यहां पहुंचा।
दल का नेतृत्व गोविंदा सालुंखे, प्रवीण फाल बांधे और प्रफुल्ल पाटिल ने किया। वहीं होम स्टे परियोजना के प्रभारी अधिकारी आर.डी. सिद्दीकी ने अध्ययन दल को बुकिंग प्रबंधन, अतिथि सत्कार, पर्यटन गतिविधियों और ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
“यहां से सीखकर अपने गांवों को भी बनाएंगे पर्यटन केंद्र”
अध्ययन दल में शामिल महिलाओं और होम स्टे संचालकों ने कहा कि देवगढ़ का भ्रमण उनके लिए अत्यंत लाभकारी रहा। यहां उन्होंने सीखा कि सीमित संसाधनों में भी पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं और आत्मीय वातावरण कैसे दिया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि अपने क्षेत्रों में बनने वाले होम स्टे को अधिक सुविधाजनक और पर्यटक-अनुकूल बनाने में देवगढ़ का अनुभव बेहद उपयोगी साबित होगा।
जय भवानी समिति बनी सफलता की मजबूत कड़ी
भ्रमण दल की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी जय भवानी ग्राम विकास समिति ने संभाली। समिति और स्थानीय होम स्टे संचालकों ने अध्ययन दल को ग्रामीण पर्यटन के हर पहलू से परिचित कराया। अंतिम दिन आयोजित कार्यशाला में सभी प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और देवगढ़ मॉडल की सराहना की।


सफलता की कहानी
देवगढ़ ने साबित कर दिया है कि यदि स्थानीय समुदाय, प्रशासन और पर्यटन विभाग मिलकर काम करें तो गांव केवल विकास की राह पर नहीं बढ़ते, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा बन सकते हैं। आज देवगढ़ का होम स्टे मॉडल रोजगार, महिला सशक्तिकरण, आदिवासी संस्कृति संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है।