Home CITY NEWS

दस साल से बिना गैस कनेक्शन चल रहा आदिवासी छात्रावास!
18 हजार का चेक देने के बावजूद कनेक्शन नहीं, फिर सिलेंडर कहां से आ रहे?

भिंमालगोंदी के सीनियर आदिवासी बालक छात्रावास में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल | दूसरे छात्रावास से सिलेंडर और कभी ब्लैक में गैस खरीदने का दावा

विशेष रिपोर्ट

छिंदवाड़ा। जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित सीनियर आदिवासी बालक छात्रावास भिंमालगोंदी की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। छात्रावास में लंबे समय से गैस कनेक्शन नहीं होने की बात सामने आई है, बावजूद इसके यहां भोजन पकाने के लिए गैस सिलेंडरों का उपयोग किया जा रहा है। सवाल यह है कि जब छात्रावास के नाम पर अधिकृत गैस कनेक्शन ही नहीं है, तो आखिर सिलेंडर कहां से आ रहे हैं और उनकी व्यवस्था किस नियम के तहत की जा रही है?
18 हजार का चेक, लेकिन गैस कनेक्शन का पता नहीं
जानकारी के अनुसार पूर्व अधीक्षक शांताराम ठाकरे के कार्यकाल में नाहर गैस एजेंसी के नाम करीब 18 हजार रुपये का चेक दिए जाने की बात सामने आई है। लेकिन वर्तमान अधीक्षक के अनुसार जब गैस कनेक्शन का कार्ड और संबंधित दस्तावेज मांगे गए तो पूर्व अधीक्षक द्वारा कनेक्शन नहीं होने की बात कही गई।
जब अधीक्षक ने इस मामले में गैस एजेंसी से जानकारी लेने पर कथित रूप से यह सामने आया कि एजेंसी के पास कनेक्शन के लिए आवश्यक दस्तावेज ही जमा नहीं किए गए थे। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि कनेक्शन के लिए दस्तावेज ही जमा नहीं हुए तो 18 हजार रुपये का भुगतान किस मद में किया गया और उसका उपयोग कैसे हुआ?
दूसरे छात्रावास से सिलेंडर लेकर चल रहा संचालन!
वर्तमान अधीक्षक ने बताया कि उन्हें पूर्व अधीक्षक द्वारा केवल तीन सिलेंडर दिए गए थे। नियमित गैस व्यवस्था के लिए वे दूसरे छात्रावास के अधीक्षक से सिलेंडर लेते रहे हैं। इसके अलावा कभी-कभी बाजार से गैस लेने की बात भी सामने आई है।
अधीक्षक के अनुसार ओटीपी व्यवस्था लागू होने के बाद अनधिकृत तरीके से सिलेंडर मिलने में भी परेशानी आ रही है। ऐसे में छात्रावास में रोजाना बच्चों के लिए भोजन कैसे तैयार हो रहा है, यह भी जांच का विषय बन गया है।
दस साल से कनेक्शन नहीं तो इतने वर्षों तक व्यवस्था कैसे चली?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि छात्रावास में वर्षों से गैस कनेक्शन नहीं है, तो इतने लंबे समय से गैस आधारित भोजन व्यवस्था कैसे संचालित होती रही? क्या विभागीय अधिकारियों ने कभी छात्रावास के गैस कनेक्शन, गैस एजेंसी के दस्तावेज, सिलेंडर की खरीद और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड की जांच की?
यदि छात्रावास के नाम पर कोई अधिकृत गैस कनेक्शन नहीं है, तो गैस की खरीद के बिल किस आधार पर प्रस्तुत किए गए? यदि बिल नहीं हैं तो सरकारी राशि से गैस व्यवस्था का भुगतान कैसे हुआ? इन सभी बिंदुओं की जांच आवश्यक है।
**बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ तो नहीं?
छात्रावास में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। गैस सिलेंडर जैसी ज्वलनशील सामग्री के उपयोग के लिए सुरक्षित और अधिकृत व्यवस्था होना जरूरी है। ऐसे में यदि छात्रावास में अधिकृत कनेक्शन के बिना गैस सिलेंडर का उपयोग हो रहा है, तो सुरक्षा मानकों की जांच क्यों नहीं की गई?
यदि भविष्य में किसी प्रकार की गैस संबंधी दुर्घटना होती है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी—स्थानीय छात्रावास प्रबंधन की, विभागीय अधिकारियों की या उस अधिकारी की जिसने वर्षों तक गैस कनेक्शन की व्यवस्था नहीं कराई?
सहायक आयुक्त कार्यालय को भी जानकारी नहीं?
मामले का एक और गंभीर पहलू यह है कि छात्रावास में गैस कनेक्शन नहीं होने की स्थिति की जानकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची या नहीं, इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि विभाग को इसकी जानकारी नहीं थी तो यह विभागीय निरीक्षण व्यवस्था पर सवाल है और यदि जानकारी थी तो इतने वर्षों तक सुधारात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
पूर्व अधीक्षक की लापरवाही का खामियाजा नए अधीक्षक पर?
वर्तमान अधीक्षक के सामने अब सबसे बड़ी समस्या गैस की नियमित व्यवस्था को लेकर है। पूर्व व्यवस्था में यदि गैस कनेक्शन नहीं कराया गया था, तो उसका खामियाजा वर्तमान अधीक्षक और छात्रावास में रहने वाले बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
हालांकि पूरे मामले में पूर्व अधीक्षक, वर्तमान अधीक्षक, गैस एजेंसी और विभागीय अधिकारियों की भूमिका की दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष जांच जरूरी है।
जांच के बाद सामने आएगा सच
मामले में यह जांच जरूरी है कि—
छात्रावास के नाम पर गैस कनेक्शन कभी लिया गया या नहीं?
18 हजार रुपये का चेक किस आधार पर जारी किया गया?
भुगतान का बिल, रसीद और वाउचर कहां है?
गैस एजेंसी के रिकॉर्ड में छात्रावास का कनेक्शन क्यों नहीं है?
वर्षों से गैस सिलेंडर की व्यवस्था कहां से होती रही?
दूसरे छात्रावास से सिलेंडर लेने की अनुमति किस अधिकारी ने दी?
गैस खरीद के लिए विभागीय बजट से कितनी राशि खर्च हुई?
गैस सिलेंडर के उपयोग और भंडारण की सुरक्षा जांच कब हुई?
छात्रावास का विभागीय निरीक्षण कितनी बार हुआ और निरीक्षण रिपोर्ट में क्या उल्लेख है?
अब देखना यह है कि जनजातीय कार्य विभाग इस मामले को केवल एक छात्रावास की समस्या मानकर छोड़ देता है या फिर रिकॉर्ड, भुगतान और गैस कनेक्शन की पूरी श्रृंखला की जांच कर जिम्मेदारी तय करता है। बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस मामले में विभाग की चुप्पी भी कई सवालों को जन्म दे रही है।