सफलता की कहानी के पीछे बड़ा सवाल: क्या उद्यानिकी विभाग की योजनाओं का लाभ सभी किसानों तक पहुंच रहा है?
छिंदवाड़ा। उद्यानिकी विभाग द्वारा महिला कृषक श्रीमती इन्दिरा भादे की सफलता की कहानी को कृषक कल्याण वर्ष 2026 की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। विभाग के अनुसार मोहखेड़ विकासखंड के ग्राम चारगांव करबल की महिला किसान ने मात्र 0.120 हेक्टेयर में गेंदा फूल की खेती कर लगभग 11 हजार रुपये की लागत से 1.50 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित की है।
निश्चित रूप से यह उपलब्धि सराहनीय है और महिला किसानों के लिए प्रेरणादायक भी, लेकिन इस सफलता की कहानी के बीच कुछ महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े हो रहे हैं। जिले के कई किसान यह जानना चाहते हैं कि जिस प्रकार का तकनीकी मार्गदर्शन, ड्रिप सिंचाई सुविधा और बाजार तक पहुंच श्रीमती भादे को मिली, क्या वही सुविधाएं जिले के सभी पात्र किसानों को समान रूप से उपलब्ध हैं?
कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि उद्यानिकी विभाग अक्सर चुनिंदा सफल उदाहरणों को सामने रखता है, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे किसान भी हैं जिन्हें योजनाओं की जानकारी, समय पर अनुदान, तकनीकी सलाह या विपणन सहायता नहीं मिल पाती। ऐसे में कुछ सफलता की कहानियां पूरे जिले की वास्तविक स्थिति का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं।
✍️रिपोर्ट -रामकुमार राजपूत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गेंदा जैसी नकदी फसलों से वास्तव में इतनी अच्छी आय संभव है, तो विभाग को यह भी सार्वजनिक करना चाहिए कि पिछले वर्षों में कितने किसानों ने ऐसी खेती अपनाई, उनमें से कितने सफल रहे और कितने किसानों को बाजार, मौसम या लागत संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
ग्रामीण क्षेत्रों में कई किसानों का आरोप है कि योजनाओं की जानकारी समय पर नहीं पहुंचती, जबकि कुछ किसानों को विभागीय प्रक्रियाओं और अनुमोदनों के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
कृषि जानकारों का कहना है कि सफलता की कहानियां प्रेरणा देने के लिए आवश्यक हैं, लेकिन विभाग की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब ऐसी उपलब्धियां कुछ किसानों तक सीमित न रहकर व्यापक स्तर पर दिखाई दें और अधिक से अधिक छोटे एवं सीमांत किसानों को इसका लाभ मिले।
श्रीमती इन्दिरा भादे की उपलब्धि निश्चित रूप से प्रशंसनीय है, लेकिन यह भी जरूरी है कि उद्यानिकी विभाग जिलेभर में योजनाओं की पहुंच, पारदर्शिता और लाभार्थियों की वास्तविक संख्या से संबंधित आंकड़े सार्वजनिक करे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विभागीय योजनाओं का लाभ कितने किसानों तक प्रभावी रूप से पहुंच रहा है।
(नोट: यह खबर विभाग द्वारा जारी सफलता की कहानी एवं किसानों के बीच उठ रहे सामान्य सवालों के आधार पर तैयार की गई है। इसमें लगाए गए प्रश्न सार्वजनिक हित में हैं और किसी व्यक्ति अथवा संस्था पर आरोप नहीं हैं।)








