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जनसुनवाई में दिव्यांग महिला ने भीख मांगने के लिए मांगी ट्राईसाइकिल, आवेदन पर उठे कानूनी सवाल

जनसुनवाई में दिव्यांग महिला ने भीख मांगने के लिए मांगी ट्राईसाइकिल, आवेदन पर उठे कानूनी सवाल
छिंदवाड़ा। मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में एक अनोखा मामला सामने आया। एक दिव्यांग महिला प्रशासन के समक्ष ट्राईसाइकिल की मांग लेकर पहुंची। महिला का कहना था कि वह अपना जीवन-यापन करने के लिए भीख मांगती है और आने-जाने में असमर्थ होने के कारण उसे ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराई जाए।


जानकारी के अनुसार महिला पहले पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंची, जहां से उसे कलेक्टर कार्यालय भेजा गया। थाना कोतवाली के टीआई आशीष धुर्वे ने बताया कि महिला को एसपी कार्यालय से कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत किया गया। कलेक्टर ने आवेदन पर अग्रिम कार्रवाई के लिए उपसंचालक, सामाजिक न्याय विभाग को निर्देशित किया तथा मेडिकल बोर्ड की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्रता अनुसार ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराने की बात कही।


हालांकि इस पूरे मामले ने कानूनी बहस भी खड़ी कर दी है। मध्य प्रदेश में भिक्षावृत्ति से संबंधित कानून के तहत सार्वजनिक स्थानों पर भीख मांगना या भीख मांगने के उद्देश्य से स्वयं को प्रस्तुत करना प्रतिबंधित माना गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि किसी आवेदक ने स्वयं भीख मांगकर जीवन-यापन करने की बात कही है, तो प्रशासन द्वारा दी जाने वाली सहायता का उद्देश्य पुनर्वास और दिव्यांगजन कल्याण है या नहीं। इस संबंध में प्रशासन का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।


विशेषज्ञों का मानना है कि दिव्यांगजनों को ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराना एक कल्याणकारी योजना का हिस्सा है, जबकि भिक्षावृत्ति रोकने के लिए पुनर्वास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना भी प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।