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लापरवाही पर बड़ा एक्शन: पांढुरना की प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी मोनिका बिसेन निलंबित, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के संज्ञान के बाद गिरी गाज

लापरवाही पर बड़ा एक्शन: पांढुरना की प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी मोनिका बिसेन निलंबित,

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के संज्ञान के बाद गिरी गाज

भोपाल/पांढुरना – शासकीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की निरंतर अवहेलना और पदीय शिथिलता बरतने के मामले में मध्य प्रदेश शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त द्वारा जारी एक आधिकारिक आदेश के तहत, जिला पांढुरना में पदस्थ प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) श्रीमती मोनिका बिसेन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।यह दंडात्मक कार्रवाई मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम-9 के अंतर्गत वैधानिक प्रावधानों के तहत की गई है। निलंबन की अवधि के दौरान उनका मुख्यालय संभागीय संयुक्त संचालक, महिला एवं बाल विकास, जबलपुर संभाग निर्धारित किया गया है, जहां उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।क्या है पूरा मामला और विधिक आधार?विभागीय आदेश के अनुसार, यह पूरा मामला ‘भारतीय आदिम जाति सेवक संघ सौंसर’ द्वारा संचालित ‘शक्ति सदन’ के अनुदान प्रस्तावों और वहां आश्रित महिलाओं की व्यवस्थाओं से जुड़ा है। संचालनालय द्वारा इस संबंध में समय-समय पर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए थे,

लेकिन स्थानीय स्तर पर इनका उचित पालन नहीं किया गया।आदेश में उल्लेखित विधिक व प्रशासनिक आधार निम्नलिखित हैं:आदेशों की अवहेलना: संचालनालय द्वारा व्यक्तिगत उपस्थिति हेतु दिए गए निर्देशों के बावजूद श्रीमती बिसेन उपस्थित नहीं हुईं।नोटिस का विलंब से जवाब: विभाग द्वारा जारी ‘कारण बताओ सूचना पत्र’ का उत्तर उनके द्वारा अत्यधिक देरी से प्रस्तुत किया गया।अनुदान रुकने से बढ़ा विवाद: संस्था के वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 के अनुदान प्रस्तावों में पाई गई कमियों को दूर करने के लिए बार-बार निर्देश दिए गए थे। जून 2026 की समीक्षा बैठक में भी निर्देश दिए जाने के बावजूद संशोधित प्रस्ताव नहीं भेजा गया, जिससे संस्था को दो वर्षों की अनुदान राशि प्राप्त नहीं हो सकी।राष्ट्रीय आयोग का हस्तक्षेप: इस प्रशासनिक सुस्ती और अनुदान न मिलने के कारण उत्पन्न हुई गंभीर स्थिति पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया था, जिसके बाद शासन स्तर पर यह त्वरित कार्रवाई की गई।आचरण नियमों के उल्लंघन के तहत कार्रवाईआयुक्त द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि अधिकारी का यह कृत्य मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम-3 का स्पष्ट उल्लंघन है। इसे शासकीय सेवा में ‘घोर कदाचरण’ की श्रेणी में मानते हुए निलंबन की यह बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।