मृगनयनी प्रदर्शनी में सजी मध्यप्रदेश की कला-संस्कृति की रंगीन दुनिया, छिंदवाड़ा में जुटे प्रदेशभर के शिल्पकार
छिंदवाड़ा। मध्यप्रदेश की समृद्ध हस्तशिल्प और हथकरघा परंपरा को एक मंच पर देखने का अवसर अब छिंदवाड़ा वासियों को मिल रहा है। परासिया रोड स्थित होटल पूजा लॉन में आयोजित मृगनयनी मध्यप्रदेश प्रदर्शनी-2026 का शुभारंभ कलेक्टर हरेंद्र नारायन ने किया। प्रदर्शनी में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए कारीगरों और बुनकरों की अनूठी

कलाकृतियां लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।
6 जून से 16 जून 2026 तक आयोजित इस प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश की पारंपरिक कला, संस्कृति और हस्तनिर्मित उत्पादों की शानदार झलक देखने को मिल रही है। प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से रात्रि 9 बजे तक खुली रहने वाली इस प्रदर्शनी में चंदेरी, महेश्वर, उज्जैन, ग्वालियर, भोपाल, डिंडोरी, नर्मदापुरम सहित प्रदेश के कई जिलों के शिल्पकार अपने उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय कर रहे हैं।

आकर्षण का केंद्र बनीं चंदेरी और महेश्वरी साड़ियां
प्रदर्शनी में चंदेरी की जरी और रेशम किनारी वाली साड़ियां, महेश्वरी वस्त्र, वारासिवनी और सौसर की सिल्क बुनाई, उज्जैन का बाटिक प्रिंट, धार का प्रसिद्ध बाग प्रिंट, खादी उत्पाद, जरी-जरदोजी कार्य, लेदर क्राफ्ट, हस्तनिर्मित ज्वेलरी, दरी, गोंड पेंटिंग, तुलसी माला, कॉटन परिधान और लकड़ी शिल्प जैसी कलाएं विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

35 से अधिक शिल्पकारों ने सजाए अपने स्टॉल
प्रदर्शनी में लगभग 30 से 35 शिल्पकार और कारीगर अपने हुनर का प्रदर्शन कर रहे हैं। यहां आने वाले लोग न केवल पारंपरिक उत्पादों की खरीदारी कर रहे हैं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत से भी रूबरू हो रहे हैं। कारीगरों का कहना है कि ऐसे आयोजन उन्हें अपनी कला को व्यापक पहचान दिलाने और सीधे ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर प्रदान करते हैं।

स्थानीय कारीगरों को मिलेगा प्रोत्साहन
आयोजकों ने जिलेवासियों से अधिक से अधिक संख्या में प्रदर्शनी में पहुंचकर स्थानीय एवं पारंपरिक कारीगरों का उत्साहवर्धन करने की अपील की है। उनका कहना है कि हस्तनिर्मित उत्पादों की खरीद से न केवल प्रदेश की कला-संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि हजारों शिल्पकार परिवारों की आजीविका को भी मजबूती मिलेगी।
“एक छत के नीचे मध्यप्रदेश की संस्कृति”
मृगनयनी मध्यप्रदेश प्रदर्शनी केवल खरीदारी का केंद्र नहीं, बल्कि प्रदेश की विविध लोक कलाओं, हस्तशिल्प और बुनकर परंपरा का जीवंत उत्सव बन गई है। छिंदवाड़ा में पहली बार इतने बड़े स्तर पर प्रदेशभर के शिल्पकारों का संगम देखने को मिल रहा है, जिससे शहर का सांस्कृतिक माहौल भी रंगों और परंपराओं से सराबोर हो गया है।








