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करोड़ों की पाइपलाइन “कागज़ों में चालू”, शहर आज भी गंदा पानी पीने को मजबूर

करोड़ों की पाइपलाइन “कागज़ों में चालू”, शहर आज भी गंदा पानी पीने को मजबूर
छिंदवाड़ा(पंचायत दिशा समाचार)
जल संवर्धन (UIDSSMT) योजना के तहत शहर में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये खर्च कर पाइपलाइन बिछाई गई, घर-घर नीले पाइप कनेक्शन और मीटर तक लगाए गए। लेकिन हकीकत यह है कि सालों बाद भी यह पाइपलाइन आज तक चालू नहीं हो सकी।
कागज़ों में सप्लाई, जमीन पर सच्चाई शून्य
सूत्रों के अनुसार, संबंधित विभाग द्वारा शासन को यह रिपोर्ट भेज दी गई कि पाइपलाइन से जल सप्लाई शुरू हो चुकी है। जबकि जमीनी स्थिति इसके उलट है—
नई पाइपलाइन अब तक निष्क्रिय पड़ी है
पुरानी जंग लगी पाइपों से ही पानी सप्लाई हो रहा है
कई जगह नालियों का गंदा पानी मिलकर लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहा है
जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़
शहरवासी मजबूरी में वही दूषित पानी पीने को विवश हैं। इससे जलजनित बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है। लोगों का कहना है कि अगर नई पाइपलाइन समय पर चालू हो जाती, तो उन्हें साफ पानी मिल सकता था।
करोड़ों का खर्च, राजस्व का नुकसान
इस योजना पर हुए भारी खर्च के बावजूद न तो योजना का लाभ जनता तक पहुंचा, और न ही जल कर के रूप में अपेक्षित राजस्व मिल पाया। इससे शासन को दोहरी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है।
जिम्मेदार कौन?
सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या यह लापरवाही ठेकेदार की है?
या विभागीय इंजीनियरों और अधिकारियों की मिलीभगत?
बिना वास्तविक संचालन के “पूरा” दिखाकर भुगतान कैसे हुआ?
जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला बड़े भ्रष्टाचार के रूप में सामने आ सकता है।
निष्कर्ष:
“कागज़ों में विकास” और “जमीन पर बदहाल व्यवस्था” का यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य और अधिकारों के साथ गंभीर खिलवाड़ भी है। अब देखना होगा कि जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।