छिंदवाड़ा जनजातीय विभाग में फिर उठा नियुक्तियों का सवाल, छात्रावासों में अधीक्षकों की अदला-बदली पर संदेह
छिंदवाड़ा(पंचायत दिशा समाचार) जनजातीय कार्य विभाग में एक बार फिर नियुक्तियों और स्थानांतरण को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। जिले के विभिन्न छात्रावासों और आश्रम शालाओं में अधीक्षकों के अचानक हुए बदलाव ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एक शिक्षक जो वर्षों से अटैचमेंट पर जनजातीय विभाग कार्यालय छिंदवाड़ा में पदस्थ बताए जा रहे हैं, वे कथित रूप से कार्यालयीन कार्य (बाबू का काम) देख रहे हैं। बताया जाता है कि कागजों में उनकी पदस्थापना जुन्नारदेव विकासखंड के कटकूही में दर्ज है, जबकि वास्तविक रूप से वे लंबे समय से जिला कार्यालय में ही कार्यरत हैं। जो शिक्षकों के ट्रांसफर /अटैचमेंट से लेकर छात्रावास अधीक्षक की नियुक्ति का पूरा काम देखते हैं इनके इशारों में रातों-रात अधीक्षक एवं शिक्षक का अटैचमेंट हो जाता है इनके सहयोगी भी जिला मुख्यालय में बरसों से छिंदवाड़ा में पदस्थ ( बाबू ) जी है , कहने को ये दोनों एक दुसरे को गुरु कहते हैं ..!
रातों-रात बदले अधीक्षक, उठे सवाल
हाल ही में चौरई, मैनीखापा, गायखुरी, पगारा , अमरवाड़ा , और अनुसूचित जाति जूनियर बालक छात्रावास छिंदवाड़ा में अधीक्षकों के बदलाव को लेकर चर्चा तेज है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी जल्दी और एक के बाद एक इन बदलावों के पीछे क्या कारण रहे।
ट्रांसफर और अटैचमेंट पर भी चर्चा..!
विभागीय हलकों में यह भी चर्चा है कि कुछ कर्मचारियों की मदद से ट्रांसफर, अटैचमेंट और पदस्थापना से जुड़े फैसले प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
प्रशासन की भूमिका पर नजर
मामले को लेकर अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इन नियुक्तियों और स्थानांतरणों की निष्पक्ष जांच कराता है या नहीं। यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय हो सकता है।
बड़ा सवाल..
सबसे बड़ा सवाल यही है कि
क्या वर्षों से एक ही स्थान पर अटैचमेंट पर कार्यरत कर्मचारियों की भूमिका की जांच होगी?
क्या छात्रावासों में अधीक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है?
क्या 05/ 10साल से एक ही छात्रावास /आश्रम शाला में पदस्थ शिक्षक (अधीक्षकों) को क्यों नहीं हटाया जायेगा?
टीप– यह समाचार विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी और स्थानीय चर्चाओं पर आधारित है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)







