Home AGRICULTURE खाद पर ‘डिजिटल शिकंजा’: नियम तोड़ते ही लाइसेंस सस्पेंडछिन्दवाड़ा में 09 उर्वरक...

खाद पर ‘डिजिटल शिकंजा’: नियम तोड़ते ही लाइसेंस सस्पेंडछिन्दवाड़ा में 09 उर्वरक विक्रेताओं पर कार्रवाई, सिस्टम पर भी उठने लगे सवाल..!

खाद पर ‘डिजिटल शिकंजा’: नियम तोड़ते ही लाइसेंस सस्पेंड
छिन्दवाड़ा में 09 उर्वरक विक्रेताओं पर कार्रवाई, सिस्टम पर भी उठने लगे सवाल
!
छिन्दवाड़ा(पंचायत दिशा समाचार)
मध्यप्रदेश में उर्वरक वितरण को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए जिले में 09 उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। आरोप है कि इन विक्रेताओं ने शासन के निर्देशों के विपरीत ई-विकास पोर्टल के बिना खाद का वितरण किया।
कलेक्टर हरेंद्र नारायण की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक के बाद यह कार्रवाई सामने आई है। प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि नियमों में किसी भी प्रकार की ढील अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
ई-विकास अनिवार्य’: आदेश सख्त, विकल्प खत्म
कृषि विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब उर्वरकों का वितरण केवल ई-विकास पोर्टल के माध्यम से ही किया जाएगा। किसी अन्य माध्यम से बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।
कानूनी प्रावधानों का हवाला
नियमों के उल्लंघन पर प्रशासन ने चेताया है कि कार्रवाई निम्न प्रावधानों के तहत होगी:
आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955
उर्वरक (गुण नियंत्रण) आदेश 1985
जमीन पर सख्ती, सिस्टम पर चर्चा
जहां एक ओर प्रशासन इसे पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों से यह आवाज भी सामने आ रही है कि
तकनीकी प्रक्रियाएं (ओटीपी, बायोमेट्रिक) कई बार बाधा बन रही हैं
बुजुर्ग किसानों और दूरदराज के क्षेत्रों में दिक्कतें बढ़ रही हैं
हालांकि, इन मुद्दों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्तर पर आवश्यक है।
अब दुकानदार भी दबाव में
पहले टोकन और ई-प्रणाली से किसान जूझ रहे थे, अब वही सख्ती सीधे विक्रेताओं पर भी लागू हो गई है।
नियमों का पालन न करने पर सीधे लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई से व्यापारियों में भी सतर्कता बढ़ी है।
संदेश साफ: नियम से बाहर तो कार्रवाई तय
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि
“ई-प्रणाली से बाहर कोई भी वितरण अब स्वीकार नहीं होगा।”
दुकानदारों का कहना ‘तकनीकी दिक्कतों से बढ़ रही परेशानी’
कुछ उर्वरक विक्रेताओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि
“ई-विकास पोर्टल पर कई बार सर्वर, ओटीपी और बायोमेट्रिक की समस्या आती है, जिससे किसानों को समय पर खाद देना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में दबाव की स्थिति बनती है।”
विक्रेताओं का कहना है कि वे नियमों का पालन करना चाहते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर तकनीकी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
किसानों और व्यापारियों के बीच बढ़ा दबाव
जहां प्रशासन इसे पारदर्शिता और नियंत्रण की दिशा में जरूरी कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर किसान और दुकानदार दोनों ही इस व्यवस्था को लेकर अलग-अलग तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।