खरीदी केंद्र आवंटन में अनियमितता के आरोप, किसानों ने उठाई दूरी की समस्या—कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
छिंदवाड़ा (पंचायत दिशा समाचार):
चौरई विकासखंड में गेहूं खरीदी केंद्रों के आवंटन को लेकर किसानों में असंतोष बढ़ता नजर आ रहा है। किसानों ने आरोप लगाया है कि कुछ स्थानों पर खरीदी केंद्रों का निर्धारण व्यवहारिक दूरी और सुविधा को ध्यान में रखकर नहीं किया गया, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में किसानों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर स्थिति में सुधार की मांग की है।
किसानों का कहना है कि कई उपार्जन केंद्र उनके गांवों से 30 से 40 किलोमीटर दूर स्थापित किए गए हैं, जिससे परिवहन लागत बढ़ रही है और समय की भी हानि हो रही है। उनका यह भी आरोप है कि केंद्रों के चयन में पारदर्शिता की कमी रही है, हालांकि इन आरोपों की पुष्टि पंचायत दिशा समाचार नहीं करता है ये किसानों का आरोप है।
मध्य प्रदेश शासन द्वारा 10 अप्रैल 2026 से गेहूं खरीदी शुरू..
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा 10 अप्रैल 2026 से गेहूं खरीदी शुरू की जानी है और इसके लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। शासन ने स्पष्ट किया है कि खरीदी केंद्र किसानों के नजदीक हों, बारदाने की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा समय पर भुगतान की व्यवस्था रहे।
इन दिशा-निर्देशों के मद्देनजर किसानों का कहना है कि जमीनी स्तर पर इनका पूरी तरह पालन होता नजर नहीं आ रहा है। उन्होंने मांग की है कि खरीदी केंद्रों का पुनर्मूल्यांकन कर उन्हें समीपस्थ स्थानों पर स्थापित किया जाए, ताकि छोटे और मध्यम किसानों को राहत मिल सके।
एक वेयरहाउस पर कई समितियों का बोझ! खरीदी व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल, किसानों में बढ़ा आक्रोश..!
चौरई विकासखंड में इस बार गेहूं खरीदी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। किसानों का आरोप है कि कई समितियों का खरीदी केंद्र एक ही स्थान—भारद्वाज वेयरहाउस, लिखडी बना दिया गया —निर्धारित कर दिया गया है, जिससे पूरी व्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
किसानों के अनुसार गोपालपुर, , चौरई, रामगढ़, लिखडी और हिवरखेड़ी जैसी कई समितियों का खरीदी केंद्र एक ही वेयरहाउस पर तय किया गया है। यही नहीं, इसी स्थान पर चना और सरसों खरीदी केंद्र भी संचालित किए जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में किसानों का सवाल है कि इतनी बड़ी संख्या में अलग-अलग समितियों की उपज एक ही केंद्र पर कैसे सुचारू रूप से खरीदी जा सकेगी।
किसानों का कहना है कि:
एक ही केंद्र पर अत्यधिक दबाव से लंबी कतारें और अव्यवस्था की स्थिति बन सकती है
दूर-दराज के किसानों को 30–40 किलोमीटर तक परिवहन करना पड़ रहा है
समय पर तुलाई और खरीदी नहीं होने से फसल खराब होने का जोखिम बढ़ेगा
किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि केंद्र निर्धारण में स्थानीय सुविधा और दूरी के मानकों का समुचित ध्यान नहीं रखा गया, हालांकि इन आरोपों की हम पुष्टि नहीं करते है।
गौरतलब है कि शासन द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि खरीदी केंद्र किसानों के नजदीक हों और व्यवस्था ऐसी हो जिससे उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो। लेकिन जमीनी हकीकत इन निर्देशों से अलग दिखाई दे रही है, जिससे किसानों में असंतोष बढ़ रहा है।
कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन:
इस पूरी व्यवस्था के विरोध में किसानों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि खरीदी केंद्रों का पुनः निर्धारण किया जाए और प्रत्येक समिति के लिए अलग या समीपस्थ केंद्र सुनिश्चित किए जाएं, ताकि खरीदी प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके।
प्रशासन का पक्ष:
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि केंद्रों का निर्धारण निर्धारित मापदंडों के अनुसार किया गया है। यदि कहीं अधिक दबाव या असुविधा की स्थिति बनती है, तो उसकी समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
एक ही वेयरहाउस पर कई समितियों की निर्भरता से खरीदी व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका..!
एक ही वेयरहाउस पर कई समितियों की निर्भरता से खरीदी व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अब यह प्रशासन की जिम्मेदारी है कि समय रहते स्थिति का आकलन कर किसानों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करे।







