किसानों पर भारी पड़ी व्यवस्था! बींझावाड़ा सोसाइटी को दरकिनार कर 40 किमी दूर भेजा जा रहा गेहूं
छिंदवाड़ा (बींझावाडा)चौरई विकासखण्ड के बहुउद्देश्यीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्यादित बींझावाड़ा को अलग सोसाइटी का दर्जा मिलने के बावजूद गेहूं उपार्जन केंद्र का संचालन न किए जाने से क्षेत्र के किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है। किसानों ने इसे विभागीय लापरवाही और मनमानी करार दिया है।
कच्चे रास्ते और लंबी दूरी से परेशान किसान
ग्राम बींझावाड़ा, सलकनी, बिलंदा, केदारपुर, मानसिंग पिपरिया और हरनभटा के किसानों का कहना है कि वर्तमान में गेहूं उपार्जन के लिए उन्हें गोपालपुर सोसाइटी के अंतर्गत मेसर्स भारद्वाज वेयरहाउस, लिखड़ी (खटकर) भेजा जा रहा है, जो लगभग 35 से 40 किलोमीटर दूर है।
ऊपर से रास्ता भी कच्चा होने के कारण परिवहन में भारी परेशानी और अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ रहा है।
अलग सोसाइटी बनने के बावजूद नहीं मिली सुविधा
किसानों का कहना है कि बींझावाड़ा सोसाइटी को गोपालपुर से अलग किया जा चुका है, फिर भी उपार्जन केंद्र की सूची में इसका नाम शामिल नहीं किया गया।

यह पहली बार है जब अलग सोसाइटी बनने के बाद उपार्जन हो रहा है, लेकिन व्यवस्था पूरी तरह नाकाम नजर आ रही है।
किसानों की मांग – “स्थानीय स्तर पर हो खरीदी”
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि:
बींझावाड़ा सोसाइटी में ही गेहूं उपार्जन केंद्र शुरू किया जाए
स्थानीय स्तर पर खरीदी होने से समय, श्रम और धन की बचत होगी

दूरस्थ वेयरहाउस की बाध्यता समाप्त की जाए
आक्रोश बढ़ा, आंदोलन की चेतावनी
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बींझावाड़ा में उपार्जन केंद्र शुरू नहीं किया गया, तो वे मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
निष्कर्ष
सरकार द्वारा किसानों की सुविधा के लिए सोसाइटी अलग की गई, लेकिन जमीनी स्तर पर वही किसान अब और अधिक परेशान हो रहे हैं। सवाल उठता है कि जब व्यवस्था बनाई गई तो उसका लाभ किसानों तक क्यों नहीं पहुंच रहा?





