बीझावाड़ा समिति कागजों में चालू, जमीन पर बंद! किसान परेशान
छिंदवाड़ा (पंचायत दिशा समाचार) चौरई विकासखण्ड के ग्राम बींझावाडा में अलग सहकारी समिति बनाए जाने के बाद भी आज तक उसका संचालन शुरू नहीं हो पाया है। हालात यह हैं कि समिति बनने के लंबे समय बाद भी किसान मजबूर होकर गोपालपुर समिति पर निर्भर हैं। इससे क्षेत्र के किसानों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
किसानों की परेशानी बढ़ी
स्थानीय किसानों का कहना है कि बीझावाड़ा समिति बनने से उन्हें अपने ही क्षेत्र में खाद-बीज और अन्य सुविधाएं मिलने की उम्मीद थी, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। आज भी उन्हें गोपालपुर समिति के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
गोपालपुर समिति में भी अव्यवस्था
किसानों ने आरोप लगाया कि गोपालपुर समिति पहुंचने पर भी कई बार कर्मचारी मौजूद नहीं रहते, जिससे घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई किसान बिना काम के ही वापस लौटने को मजबूर हो जाते हैं।
आखिर क्यों बंद है बीझावाड़ा समिति?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब बीझावाड़ा समिति का गठन हो चुका है, तो अब तक उसका संचालन शुरू क्यों नहीं किया गया?
क्या भवन और स्टाफ की कमी है?
या फिर जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर लापरवाही बरत रहे हैं?
इन सवालों का जवाब देने वाला कोई नहीं है।
जिम्मेदारों पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में सहकारिता विभाग और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। किसानों का आरोप है कि प्रशासन की अनदेखी के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों की मांग
बीझावाड़ा समिति का तत्काल संचालन शुरू किया जाए
स्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति हो
किसानों को स्थानीय स्तर पर ही सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं
चेतावनी
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बीझावाड़ा समिति का संचालन शुरू नहीं किया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
निष्कर्ष:
बीझावाड़ा समिति का सिर्फ गठन कर देना ही पर्याप्त नहीं है, जब तक उसका सही संचालन शुरू नहीं होता, तब तक किसानों को राहत नहीं मिल सकती। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर कब जागता है।







