Home CITY NEWS रेत माफियाओं के हौसले बुलंद, विभागीय मिलीभगत के गंभीर आरोप

रेत माफियाओं के हौसले बुलंद, विभागीय मिलीभगत के गंभीर आरोप

रेत माफियाओं के हौसले बुलंद, विभागीय मिलीभगत के गंभीर आरोप
छिंदवाड़ा (बिछुआ) | पंचायत दिशा विशेष रिपोर्ट
छिंदवाड़ा जिले की बिछुआ तहसील के गट्टे क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन का काला खेल वर्षों से बेखौफ जारी है। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा कारोबार प्रशासन की नाक के नीचे संचालित हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग—वन विभाग और खनिज विभाग—चुप्पी साधे बैठे हैं। इससे विभागीय मिलीभगत के आरोप लगातार गहराते जा रहे हैं।
खुलेआम चल रहा रेत का अवैध कारोबार
क्षेत्र के खदवेली, गबड़ोसा, देवी बिछुआ और खमारपानी सहित कई गांवों में रेत माफिया सक्रिय हैं। दिनदहाड़े नदियों से रेत निकाली जा रही है और रात होते ही ट्रैक्टरों के जरिए बड़े पैमाने पर परिवहन किया जा रहा है। बिना नंबर प्लेट के दर्जनों ट्रैक्टर रोजाना सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
नदियों का अस्तित्व संकट में
ग्रामीणों के मुताबिक, क्षेत्र की जीवनदायिनी शोभना नदी और देवनदी का सीना चीरकर रेत निकाली जा रही है। वन क्षेत्र के सहानवाड़ी-खैरी मार्ग से अवैध परिवहन लगातार जारी है। बिना किसी वैध अनुमति (फिटपास) के यह खेल वर्षों से चल रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है।
सुरक्षा नाके बने ‘दिखावा’
रेत परिवहन रोकने के लिए देवी गांव में बनाया गया नाका केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सुबह 4 से 5 बजे के बीच रेत से भरे ट्रैक्टर मोहपानी माल और भंडारकुंड मार्ग से आसानी से निकल जाते हैं। जाखावाड़ा फॉरेस्ट बैरियर पर भी तैनात कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है।
सड़कें तबाह, जनता परेशान
भारी ट्रैक्टरों की लगातार आवाजाही से गांवों की सड़कों की हालत बदतर हो चुकी है। ग्रामीणों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
क्षेत्रवासियों ने शासन-प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही रेत माफियाओं पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।
बड़ा सवाल
क्या वन और खनिज विभाग की चुप्पी मिलीभगत का संकेत है?
क्यों नहीं हो रही अवैध खनन पर ठोस कार्रवाई?
कब बचेगी नदियां और कब रुकेगा यह काला खेल?
अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब जागता है या फिर रेत माफियाओं का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।