भूत का साया बताकर छात्रा को निकाला हॉस्टल से! कोयलांचल के छात्रावास में अंधविश्वास और प्रताड़ना का गंभीर मामला
छिंदवाड़ा (चौथा स्तंभ )
जहां देश विज्ञान और आधुनिक शिक्षा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं छिंदवाड़ा जिले के कोयलांचल क्षेत्र के एक छात्रावास में अंधविश्वास और प्रताड़ना का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां की महिला अधीक्षक पर आरोप है कि उन्होंने एक छात्रा को “भूत का साया” बताकर हॉस्टल से निकाल दिया, जिससे शिक्षा व्यवस्था और विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पीड़ित छात्रा और उसके परिजनों ने इस पूरे मामले की शिकायत परासिया एसडीएम से करते हुए न्याय की गुहार लगाई है।
भूत का साया बताकर भेज दिया घर
परिजनों का आरोप है कि छात्रा महादेव यात्रा से लौटने के बाद महिला अधीक्षिका ने यह कहकर उसे हॉस्टल से बाहर कर दिया कि उस पर “भूत झूम गया है” और उसका इलाज करवाया जाए। इसके बाद छात्रा को हॉस्टल में वापस नहीं लिया जा रहा है।
इस घटना ने सरकारी छात्रावासों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छात्रा से करवाया जाता था घरेलू काम
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि छात्रावास अधीक्षिका छात्रा से झाड़ू-पोंछा, बर्तन साफ करने और खाना बनाने जैसे घरेलू काम करवाती थीं। विरोध करने पर मारपीट और मानसिक प्रताड़ना की जाती थी।
मारपीट से तंग आकर आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश
छात्रा का आरोप है कि एक बार पापड़ खाने की बात पर अधीक्षिका ने उसे बेरहमी से पीटा, जिससे आहत होकर उसने फांसी लगाने का प्रयास किया। हालांकि साथ में रहने वाली छात्राओं ने समय रहते उसे बचा लिया।
पहले भी विवादों में रह चुकी अधीक्षक
परिजनों का कहना है कि संबंधित अधीक्षक पहले भी छात्राओं के साथ अभद्र व्यवहार को लेकर विवादों में रह चुकी हैं। इसके बावजूद विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
मामले ने अनुसूचित जाति विभाग के छात्रावास प्रबंधन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि विभागीय अधिकारियों को कई बार शिकायतें मिलने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
कार्रवाई की मांग
परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषी अधीक्षक पर सख्त कार्रवाई की जाए और छात्रा को पुनः छात्रावास में प्रवेश दिलाया जाए, ताकि उसकी पढ़ाई प्रभावित न हो।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या शिक्षा देने वाले छात्रावासों में अंधविश्वास और प्रताड़ना का यह सिलसिला रुकेगा या फिर विभाग चुप्पी साधे रहेगा?
अधिकारियों का कहना है पहले भी कर चुके हैं कार्यवाही..
जब इस पूरे मामले में जनजाति कर विभाग के क्षेत्र संयोजक से बात की गई तो उनका कहना है कि पहले भी शिकायत पर अधीक्षिका का पर कार्रवाई कर चुके हैं, लेकिन अधीक्षिका ने कोर्ट से स्टे ले आई थी इसलिए उन्हें वहां से नहीं हटाया गया है, अब शिकायत की पुन जांच की जाएगी और यदि अधीक्षिका की गलती निकलती है तो कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी







