Home CITY NEWS छिंदवाड़ा जिलें में राष्ट्रीय संरक्षण उपभोक्ता दिवस सिर्फ औपचारिकता तक सीमित….

छिंदवाड़ा जिलें में राष्ट्रीय संरक्षण उपभोक्ता दिवस सिर्फ औपचारिकता तक सीमित….

छिंदवाड़ा जिलें में राष्ट्रीय संरक्षण उपभोक्ता दिवस सिर्फ औपचारिकता तक सीमित….

हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 24 दिसम्बर को में मनाया गया राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण दिवस,

मंच से औपचारिकताओं तक ही सीमित रह जाता है, यह कैसा उपभोक्ता संरक्षण दिवस…

चौथा स्तंभ (छिंदवाड़ा ) जिला मुख्यालय में प्रतिवर्ष अनुसार
हर वर्ष भी 24 दिसम्बर को राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण दिवस औपचारिकताएं पूरी कर वाहवाही लूट ली गई।

जिला आपूर्ति अधिकारी ने सिर्फ खानापूर्ति कर मनाया राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण दिवस के कार्यक्रम में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के अंतर्गत बनाये गए नियम जिसमें उपभोक्ता संरक्षण गतिविधयों के संचालन, शासकीय योजनाओं के माध्यम से उपभोक्ताओं को दी जाने वाली सुविधाओ के संबंध में उपभोक्ता जागरूकता संबंधी विषयों पर उपभोक्ता जागरुकता कार्यक्रम की प्रदर्शिनियां लगाने हेतु फ्लैक्स, बैनर, पम्पलेट आदि उपभोक्ताओं के हितों से संबंधित जानकारी दी गई।

विश्व में भ्रष्टाचार में देश का स्थान…

गौरतलब है कि यदि उपभोक्ता मामलों से जुड़े सभी अधिकारी भर नहीं हर उस विभाग के लोग जिन्होंने सुशासन दिवस की शपथ लिया है 100 नहीं तो 80 प्रतिशत ही कार्य ईमानदारी से करें तो वह दिन दूर नहीं जब देश विश्व में अपना अलग स्थान रखेगा, जो अभी भ्रष्टाचार के मामले में वर्ष 2024 के हिसाब से विश्व के 180 देशों में 96वाँ स्थान रखता है यदि सभी उस शपथ को निभाएं तो लोग सम्मान की नजर से देखेंगे।

क्या है हकीक़त

कुछ नमूनों पर गौर करने लायक है, सबसे पहले हम मिठाई के दुकान की बात करते हैं जहां लगभग हर नागरिक जाता है, वहां डिब्बे सहित मिठाई तोली जाती है जिसमें 70 ग्राम से लेकर 100 ग्राम तक डिब्बे का वजन होता है और उस डिब्बे की कीमत मिठाई की कीमत के बराबर होती है, दूसरी तरफ पेट्रोल पंपों में डीजल या पेट्रोल लेते हैं तो उनके मीटर 0 से न उठ कर 5 या 7 से उठते हैं इतना ही नहीं हर पेट्रोल पंपों में उपभोक्ता की गाड़ी में मिलने वाली निःशुल्क हवा भी नहीं मिलती है, कभी हवा वाला पंप खराब होने या कभी कर्मचारी न होने का बहाना बताया जाता है, मिलावटी सामान दुकानों में बेच कर उपभोक्ता को असली सामान के नाम पर ठगा जाता है, पैक्ड सामान में जितना वजन लिखा जाता है उतना वजन नहीं निकलता है, बहुत सी दुकानों के तराजू में सील नहीं लगी होने से कम वजन उपभोक्ता को दिया जाता है इतना ही नहीं आजकल चल रहे इलेक्ट्रॉनिक कांटों को सही ढंग से कैलिब्रेट नहीं किया जाता है जिसके चलते उपभोक्ता ठगा जा रहा है, दवाइयों की बात करें तो जेनरिक दवाओं को इथिकल के नाम पर बेचा जाता है और इथिकल के रेट से पैसा लिया जाता है। खुला तेल या कोई भी तरल पदार्थ लीटर से नापा जाता है तो वह लीटर का माप भी कम होता है क्योंकि उसको नीचे से या बगल से पचका कर रखा जाता है। अभी धान की खरीदी की जा रही है, बहुत से खरीदी केंद्रों में 40 किलो की जगह 41 और 42 किलो किसान से लिया जा रहा है, यही है उपभोक्ता संरक्षण।

क्या है जनता की मांग..

अब यदि बात करें जिम्मेदार विभागों की तो नाप तौल विभाग, खाद्य विभाग, फूड सेफ्टी विभाग, औषधि विभाग जैसे विभाग जो आम जनता के हित के लिए बनाए गए हैं सभी फील गुड करने में लगे हैं, यदि ये अपना दायित्व ठीक से निभाते तो इस कार्यक्रम की आवश्यकता नहीं पड़ती, यदि खाद्य विभाग पेट्रोल, डीजल की डेंसिटी चेक करता, नाप तौल विभाग नाप को चेक करता, फूड सेफ्टी विभाग शुद्धता चेक करता, ड्रग अधिकारी दवाओं को चेक करता तो आम जनता को कितनी राहत मिलती और तब सही मायने में उपभोक्ता संरक्षण दिवस का मान होता।

एक सवाल

अब सवाल यह उठता है कि क्या आम एव गरीब, मजदूर, ग्रामीण भर नहीं शहरी उपभोक्ताओं के साथ न्याय हो रहा है या जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन ईमानदारी से कर रहे हैं।