प्रयागराज विवाद पर संतों का सख्त संदेश: “नेता की नीयत साफ नहीं तो टकराव तय”
छिंदवाड़ा (पंचायत दिशा) आज छिंदवाड़ा द्वारका शारदा पीठ जगतगुरु शंकराचार्य सदानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि प्रयागराज में गंगा स्नान को लेकर उठे विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थन में खुलकर सामने आए स्वामी सदानंद सरस्वती ने सरकार पर सीधा सवाल दागते हुए कहा—“जब संतों को गंगा स्नान से रोका जाएगा, तो टकराव तो होगा ही।”
उन्होंने दो टूक कहा कि किसी संत को आस्था के प्रतीक गंगा स्नान से वंचित करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ भी है। “यह सब क्यों हुआ, इसके कारण सभी जानते हैं,” कहते हुए उन्होंने इशारों-इशारों में सत्ता के निर्णयों पर सवाल खड़े कर दिए।
राजनीति पर कड़ा प्रहार
स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि राजनीति यदि धर्म और नैतिकता से विमुख हो जाए तो ऐसे विवाद जन्म लेते हैं।
“राजनीति धर्म से नियंत्रित होनी चाहिए। जो नीति पूर्वक राज्य चलाए वही सच्चा राजनेता है,” उन्होंने कहा।
उनका यह बयान सीधे तौर पर सत्ता के नैतिक आधार पर चोट करता नजर आया। उन्होंने बिना नाम लिए स्पष्ट संकेत दिया कि जब नेता की नीयत डगमगाती है, तब शासन की दिशा भी भटक जाती है।
शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती सरकार को UGC कानून वापस रद्द करना चाहिए
छिंदवाड़ा पहुंचे शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती सरकार को UGC कानून वापस रद्द करना चाहिए उन्होंने कहा कि सरकार सवर्ण और निचली जाति के लोगों को लड़ाने का प्रयास कर रही है क्योंकि जब पहले से ही अनुसूचित जनजाति और पिछड़ी जातियों के लिए कानून है इस तरीके का कानून लाना न्याय संगत नहीं इसमें संशोधन नहीं बल्कि इसे रद्द करने की जरूरत है।
“नीयत सही तो शासन सही”
संत ने कहा कि नैतिकता के बिना राजनीति केवल सत्ता का खेल बनकर रह जाती है। “नेता में नैतिकता होगी तभी सही सरकार चल सकती है। सच्चा राजनेता वही है जो नीति और धर्म के मार्ग पर चलकर राज्य का संचालन करे।”
प्रयागराज से उठी यह आवाज अब राजनीतिक गलियारों में गूंज रही है। सवाल यह है—क्या सत्ता इस संदेश को आत्ममंथन के रूप में लेगी या विवाद और गहराएगा?







