कम बारिश से जलाशयों में घटा पानी, पेयजल और रबी सिंचाई के प्रबंधन की तैयारी
कन्हरगांव जलाशय में 5 प्रतिशत और सारोठ में मात्र 3 से 4 प्रतिशत पानी शेष, जल उपयोगिता समिति की बैठक में बनी रणनीति
छिंदवाड़ा। जिले में कम बारिश के चलते जलाशयों का जलस्तर घटने लगा है। ऐसे में पेयजल आपूर्ति और रबी फसलों की सिंचाई के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन के सामने चुनौती बन गया है। इसी को लेकर वर्ष 2026-27 के लिए जिला जल उपयोगिता समिति की बैठक कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में सांसद विवेक बंटी साहू की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में जलाशयों में उपलब्ध पानी के बेहतर प्रबंधन, जल संरक्षण और किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने की रणनीति पर चर्चा की गई।
बैठक में जल संसाधन, कृषि एवं विद्युत विभाग के अधिकारियों सहित संबंधित जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। जानकारी के अनुसार, कम वर्षा के कारण जिले के प्रमुख जलाशयों में जलभराव की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। कन्हरगांव जलाशय में लगभग 5 प्रतिशत और सारोठ जलाशय में केवल 3 से 4 प्रतिशत पानी शेष बताया गया है। जलाशयों में पानी की सीमित उपलब्धता को देखते हुए आगामी रबी सीजन में सिंचाई के लिए जल वितरण की योजना पर विशेष जोर दिया गया।
पेयजल आपूर्ति को प्राथमिकता
बैठक में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ कृषि कार्यों के लिए पानी का नियोजित उपयोग करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों को पानी की बर्बादी रोकने, अवैध जल उपयोग पर नियंत्रण रखने और जलाशयों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। साथ ही किसानों को कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों की बुवाई के प्रति जागरूक करने की योजना पर भी चर्चा हुई।
सूखा राहत के लिए सर्वे का मुद्दा उठा
बैठक में छिंदवाड़ा और पांढुर्णा क्षेत्र के किसानों की सूखा राहत की मांग पर भी चर्चा की गई। प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराकर राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी) 6-4 के प्रावधानों के तहत पात्र किसानों को राहत दिलाने के लिए शासन स्तर पर प्रस्ताव भेजने की बात कही गई। कम बारिश से प्रभावित किसानों को राहत दिलाने की मांग के बीच अब सर्वे और आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर रहेगी।








