छिंदवाड़ा से कांग्रेस में ‘घर वापसी’ की शुरुआत, अमित सक्सेना ने थामा हाथ
हजारों समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल हुए जिला पंचायत उपाध्यक्ष; नकुलनाथ बोले— गलती स्वीकार करने वालों के लिए पार्टी के दरवाजे खुले
भाजपा में संगठन की बात होती है, विकास की नहीं: अमित सक्सेना
छिंदवाड़ा। जिले की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं भाजपा नेता अमित सक्सेना ने पूर्व सांसद नकुलनाथ की उपस्थिति में राजीव भवन स्थित कांग्रेस कार्यालय में अपने हजारों समर्थकों के साथ कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। नकुलनाथ ने कांग्रेस का गमछा पहनाकर अमित सक्सेना सहित सभी समर्थकों का पार्टी में स्वागत किया। इस घटनाक्रम को जिले में कांग्रेस के घर वापसी अभियान की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
छिंदवाड़ा से शुरू हुआ घर वापसी अभियान: नकुलनाथ
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद नकुलनाथ ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कांग्रेस में घर वापसी अभियान शुरू करने की बात कही है। इसकी शुरुआत छिंदवाड़ा से हो चुकी है और छिंदवाड़ा मॉडल से इस अभियान का आगाज होना खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के दरवाजे खुले हैं, लेकिन उन लोगों के लिए जो अपनी गलती का एहसास कर उसे स्वीकार करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के दरवाजे सभी के लिए नहीं, बल्कि अपनी गलती मानने वालों के लिए खुले हैं।
नकुलनाथ ने पांढुर्णा जिले में हुए किसान आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान जनता का मौजूदा सरकार के प्रति आक्रोश दिखाई दिया। उनके अनुसार, समाज का हर वर्ग परेशान है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी को नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं।
‘कमलनाथ जी को धोखा देना दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय था’
कांग्रेस की सदस्यता लेने के बाद अमित सक्सेना ने अपने संबोधन में कहा कि उनके पिता के समान मार्गदर्शक और उन्हें नेता बनाने वाले कमलनाथ जी हैं। उन्होंने कहा कि उनसे गलती हुई और कमलनाथ जी को धोखा देना दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय था। अपने फैसले पर पछतावा जताते हुए उन्होंने कमलनाथ, नकुलनाथ और उपस्थित कांग्रेसजनों से क्षमा मांगी। उन्होंने कहा कि अपनी भूल के लिए माफी मांगने के अलावा उनके पास कोई दूसरा शब्द नहीं है।
सक्सेना ने कहा कि कमलनाथ और नकुलनाथ जैसे जनप्रतिनिधि छिंदवाड़ा संसदीय क्षेत्र को मिलना मुश्किल है। भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि वहां संगठन को मजबूत करने की चर्चा तो होती है, लेकिन विकास के मुद्दों पर अपेक्षित चर्चा नहीं होती। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं के बजाय पार्टी की समस्याओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
उन्होंने विकास कार्यों के ठप होने, शासकीय योजनाओं के लिए राशि की कमी, ठेकेदारों के भुगतान लंबित रहने और सूखे से किसानों की परेशानी जैसे मुद्दे उठाए। सक्सेना के अनुसार, इन समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय भाजपा संगठन को मजबूत करने की बात कर रही है।
कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने ली सदस्यता
कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करने वालों में विजय दाढ़े, अनुपम सक्सेना, मनोज साहू, रामस्वरूप मर्राफा, कैलाश पाल, दिलीप सक्सेना, डॉ. लीलाधर विश्वकर्मा, डॉ. अजय विश्वकर्मा, छब्बीलाल विश्वकर्मा, देवेंद्र पटेल, सचिन धुर्वे, राजा धुर्वे, साजन डेहरिया, वरुण धुर्वे, नरेंद्र सिंह रघुवंशी, संत सिंह चंद्रवंशी, प्रदीप सूर्यवंशी, मानू प्रताप सक्सेना, प्रकाश गौतम, अमित डेहरिया, पंकज पटेल, शिवम डेहरिया, रामकिशन परतेती और अजय कुमरे सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल रहे।
अमित सक्सेना की कांग्रेस में वापसी को छिंदवाड़ा की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि इस राजनीतिक बदलाव का जिले में कांग्रेस और भाजपा के संगठनात्मक समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।








