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बिछुआ में तीन हजार की रिश्वत लेते डिप्टी रेंजर को रंगे हाथों पकड़ा, लोकायुक्त की कार्रवाई से वन विभाग में हड़कंप

₹3 हजार की रिश्वत लेते डिप्टी रेंजर गिरफ्तार, लोकायुक्त की कार्रवाई से वन विभाग में हड़कंप

सरकारी आवास में बुलाकर मांगी थी रिश्वत, पंजीयन निरस्त करने की दी जा रही थी कथित धमकी

छिंदवाड़ा। जिले के बिछुआ में लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए वन विभाग के डिप्टी रेंजर सुनील बनवारी को कथित तौर पर 3 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ने की कार्रवाई की। मामला इमारती लकड़ी के व्यापार से जुड़े पंजीयन पर हस्ताक्षर करने के एवज में रिश्वत मांगने का बताया जा रहा है। कार्रवाई के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया।

पंजीयन निरस्त करने की दी जा रही थी धमकी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आवेदक मोहरराम मालवीय के भाई लेखराम मालवीय के नाम से बिछुआ क्षेत्र में मध्यप्रदेश वन उपज व्यापार विनियमन अधिनियम, 1969 की धारा 11 के तहत इमारती लकड़ी के विनिर्माता एवं उपभोक्ता का पंजीयन है। आरोप है कि फर्नीचर निर्माण के लिए अलग-अलग स्थानों से इमारती लकड़ी खरीदी जाती है और इसकी जानकारी वन विभाग में जमा करनी होती है।

आवेदक का आरोप है कि संबंधित जानकारी पर हस्ताक्षर करने के बदले डिप्टी रेंजर सुनील बनवारी द्वारा 3 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी। रिश्वत नहीं देने पर पंजीयन निरस्त करने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

शिकायत के बाद बिछाया गया जाल

आवेदक ने कथित रिश्वत मांगने की शिकायत लोकायुक्त से की थी। शिकायत के आधार पर लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की। खबर के अनुसार, 13 अक्टूबर को बिछुआ स्थित वन परिसर के शासकीय आवास में कार्रवाई करते हुए डिप्टी रेंजर को रिश्वत की राशि लेते पकड़ा गया।

कार्रवाई के दौरान ट्रैप दल में निरीक्षक जितेंद्र यादव, निरीक्षक राहुल गजभिए सहित लोकायुक्त जबलपुर की टीम के सदस्य मौजूद रहे।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई

मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7 तथा 13(1)(B) और 13(2) के तहत कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में आगे की वैधानिक प्रक्रिया जारी रहने की बात कही गई है।

कार्रवाई से विभाग में मचा हड़कंप

डिप्टी रेंजर के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद वन विभाग में हलचल तेज हो गई है। अब विभागीय दस्तावेजों और संबंधित प्रकरण की जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मामले में संबंधित अधिकारी का पक्ष और विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।

नोट: यह समाचार उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। आरोपों और कानूनी कार्रवाई से संबंधित तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि तथा संबंधित अधिकारी का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।