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किसानों के मुद्दों पर अमित सक्सेना का शक्ति प्रदर्शन, बोले— ‘मैं सर्कस का शेर नहीं, जनता ने चुना है’

किसानों के मुद्दों पर अमित सक्सेना का शक्ति प्रदर्शन, बोले— ‘मैं सर्कस का शेर नहीं, जनता ने चुना है’

भाजपा जिला अध्यक्ष के नोटिस के बीच बस स्टैंड पर आमसभा, कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा ज्ञापन

छिंदवाड़ा को सूखाग्रस्त घोषित करने, चौसरा न्यूक्लियर प्लांट का काम रोकने और किसानों को चार गुना मुआवजा देने की उठाई मांग

छिंदवाड़ा। किसानों की समस्याओं और जिले के जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर भाजपा नेता एवं जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित सक्सेना ने मंगलवार को छिंदवाड़ा के बस स्टैंड पर आमसभा कर अपनी मांगें उठाईं। भाजपा जिला अध्यक्ष की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बीच आयोजित इस सभा में सक्सेना ने स्पष्ट कहा कि वे पार्टी की कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं और किसानों तथा आम जनता के मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते रहेंगे। सभा के बाद उन्होंने कलेक्ट्रेट पहुंचकर राज्य शासन के नाम ज्ञापन सौंपा।

‘मैं सर्कस का शेर नहीं, जनता ने चुना है’

आमसभा को संबोधित करते हुए अमित सक्सेना ने कहा, “मैं सर्कस का शेर नहीं हूं, मुझे जनता ने चुना है। मैं जनता की लड़ाई लड़ूंगा। अगर इसको लेकर मेरा निष्कासन भी होता है तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं हमेशा जनता के साथ खड़ा रहा हूं और आगे भी खड़ा रहूंगा।”

उनके इस बयान को भाजपा संगठन के साथ चल रहे विवाद के बीच उनके रुख के रूप में देखा जा रहा है। सक्सेना ने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते किसानों की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी है।

सूखे, मुआवजे और पानी के संकट पर उठाईं मांगें

ज्ञापन में सक्सेना ने छिंदवाड़ा जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि खेती से जुड़ी समस्याओं और किसानों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए शासन को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने चौसरा में प्रस्तावित न्यूक्लियर प्लांट का काम रोकने, किसानों को चार गुना मुआवजा देने तथा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कुएं और ट्यूबवेल खुदवाकर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग भी रखी।

सक्सेना ने किसानों की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देने की बात कही। हालांकि, इन मांगों पर शासन की ओर से क्या निर्णय लिया जाएगा, यह आगे स्पष्ट होगा।

शिवराज सिंह चौहान का उदाहरण देकर उठाया सवाल

भाजपा जिला अध्यक्ष की ओर से जारी नोटिस के संबंध में सक्सेना ने कहा कि वे 13 अक्टूबर के बाद अपना जवाब देंगे। उन्होंने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि जब शिवराज सिंह चौहान अपने क्षेत्र में प्रदर्शन कर सकते हैं, तो वे किसानों की मांगों को लेकर ज्ञापन क्यों नहीं दे सकते?

इस बयान के बाद संगठनात्मक अनुशासन और जनहित के मुद्दों को उठाने के अधिकार को लेकर विवाद चर्चा में है। अब संगठन की ओर से उनके जवाब पर क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर नजर रहेगी।

कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे सक्सेना

लोकसभा चुनाव के दौरान अमित सक्सेना कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। वर्तमान घटनाक्रम के बीच उनकी राजनीतिक स्थिति को लेकर चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि, कांग्रेस में उनकी वापसी को लेकर फिलहाल किसी औपचारिक घोषणा की जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इस संबंध में चल रही चर्चाओं को राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

22 हजार मतों के अंतर से जीत का दावा

जिला पंचायत चुनाव में अमित सक्सेना ने करीब 22 हजार मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। अब किसानों के मुद्दों को लेकर उनकी सार्वजनिक सभा और ज्ञापन सौंपने की कार्रवाई जिले की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है।

फिलहाल किसानों की मांगों और संगठन के नोटिस के बीच सक्सेना ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। उनका कहना है कि पार्टी में उनकी स्थिति चाहे जो हो, वे जनता और किसानों से जुड़े मुद्दों को उठाते रहेंगे। अब यह देखना होगा कि शासन किसानों की मांगों पर क्या कदम उठाता है और भाजपा संगठन इस मामले में आगे क्या निर्णय लेता है।