जनजातीय कार्य विभाग में नियंत्रण और निगरानी पर सवाल, वर्षों से अटैचमेंट और गैस कनेक्शन का विवाद!
भीमालगोंदी छात्रावास में बिना वैध गैस कनेक्शन के संचालन का आरोप, लाखों के बिलों के भुगतान की जांच की मांग
तुमड़ागढ़ी के कंप्यूटर ऑपरेटर वासुदेव छेंरके की बिछुआ तहसील कार्यालय में 10 से 15 साल से अटैचमेंट पदस्थापना का दावा; विभागीय व्यवस्था पर उठे सवाल
छिंदवाड़ा/बिछुआ। जनजातीय कार्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक ओर तुमड़ागढ़ी के कंप्यूटर ऑपरेटर वासुदेव छेरके के बिछुआ तहसील कार्यालय में करीब 10 से 15 वर्षों से अटैचमेंट पर पदस्थ रहने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर आदिवासी सीनियर बालक छात्रावास भीमालगोंदी में गैस कनेक्शन की वैधता को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। इन मामलों ने विभागीय नियंत्रण, प्रशासनिक निगरानी और शासकीय खर्चों की जांच की आवश्यकता को सामने ला दिया है।
बिना वैध गैस कनेक्शन के बिल कैसे हुए पास?
भीमालगोंदी स्थित आदिवासी सीनियर बालक छात्रावास में गैस कनेक्शन की वैधता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, छात्रावास के पूर्व अधीक्षक शांताराम ठाकरे के कार्यकाल में वर्ष 2016 से गैस कनेक्शन की वैधता संदिग्ध होने के बावजूद गैस संबंधी खर्चों के बिलों का भुगतान किए जाने का आरोप है। यदि संबंधित अवधि में वैध कनेक्शन उपलब्ध नहीं था, तो सवाल यह है कि गैस के नाम पर प्रस्तुत बिलों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ और भुगतान की अनुमति किसने दी?
मामले में यह भी जांच का विषय है कि गैस आपूर्तिकर्ता के दस्तावेज, कनेक्शन का उपभोक्ता क्रमांक, सिलेंडर आपूर्ति की रसीदें, भुगतान अभिलेख और छात्रावास के स्टॉक रजिस्टर का नियमानुसार मिलान किया गया था या नहीं। यदि रिकॉर्ड में अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका निर्धारित की जानी चाहिए।
बच्चों की सुरक्षा और भोजन व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी?
छात्रावास में रहने वाले आदिवासी विद्यार्थियों की सुरक्षा और भोजन व्यवस्था विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में रसोई में इस्तेमाल होने वाले गैस कनेक्शन की वैधता, सुरक्षा मानकों और नियमित निरीक्षण को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर विषय है। सवाल यह है कि छात्रावास का निरीक्षण करने वाले अधिकारियों ने इन व्यवस्थाओं की जांच कितनी गंभीरता से की? क्या निरीक्षण के दौरान गैस कनेक्शन और संबंधित अभिलेखों का सत्यापन किया गया था?
हालांकि, बच्चों की सुरक्षा से जुड़े किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वास्तविक स्थिति, निरीक्षण रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेजों की जांच आवश्यक है।
10 से 15 साल का अटैचमेंट, विभागीय व्यवस्था पर सवाल
दूसरी ओर, तुमड़ागढ़ी के कंप्यूटर ऑपरेटर वासुदेव छेरके की बिछुआ तहसील कार्यालय में लंबे समय से अटैचमेंट पर पदस्थापना को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि यह अवधि और पदस्थापना संबंधी जानकारी सही है, तो यह जांच जरूरी है कि अटैचमेंट किस आदेश के तहत किया गया, समय-समय पर इसकी समीक्षा हुई या नहीं और संबंधित कर्मचारी की मूल पदस्थापना पर वापसी के संबंध में कोई निर्णय लिया गया या नहीं।
यह मामला केवल एक कर्मचारी की पदस्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि विभागीय आदेशों के पालन और प्रशासनिक व्यवस्था की जवाबदेही से भी जुड़ा है। संबंधित आदेशों और सेवा अभिलेखों की जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सहायक आयुक्त की निगरानी पर भी उठ रहे सवाल
दोनों मामलों में जनजातीय कार्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। छात्रावासों में सुविधाओं, सुरक्षा और खर्चों का सत्यापन करने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होती है। वहीं कर्मचारियों की पदस्थापना और अटैचमेंट की समीक्षा भी निर्धारित नियमों के अनुसार होनी चाहिए।
ऐसे में सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग से अपेक्षा है कि वे दोनों मामलों के अभिलेखों की जांच कराएं। यदि गैस कनेक्शन के नाम पर नियम विरुद्ध भुगतान हुआ है या अटैचमेंट संबंधी आदेशों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए।
इन बिंदुओं पर हो निष्पक्ष जांच
- वर्ष 2016 से अब तक छात्रावास में गैस कनेक्शन की वैधता और उपलब्धता की जांच की जाए।
- गैस कनेक्शन के नाम पर प्रस्तुत बिलों, भुगतान वाउचरों और आपूर्ति रसीदों का मिलान किया जाए।
- पूर्व अधीक्षक शांताराम ठाकरे के कार्यकाल के अभिलेखों तथा संबंधित अधिकारियों की निरीक्षण रिपोर्ट की जांच हो।
- तुमड़ागढ़ी के कंप्यूटर ऑपरेटर वासुदेव छेरके की अटैचमेंट अवधि, आदेशों और वर्तमान पदस्थापना की स्थिति स्पष्ट की जाए।
- जांच में अनियमितता प्रमाणित होने पर संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब जवाबदेही तय होगी या सवाल फाइलों में ही दबे रहेंगे?
जनजातीय विद्यार्थियों की सुविधाओं और शासकीय धन के उपयोग से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। भीमालगोंदी छात्रावास के गैस कनेक्शन और बिल भुगतान की वास्तविक स्थिति तथा बिछुआ तहसील कार्यालय में लंबे समय से बताए जा रहे अटैचमेंट की स्थिति अभिलेखीय जांच से स्पष्ट होनी चाहिए। अब देखना यह है कि विभाग इन सवालों पर संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराता है या नहीं।
वर्तमान अधीक्षक का कहना क्या है
जब इस विषय में आदिवासी सीनियर आदिवासी बालक छात्रावास के अधीक्षक से बात कि गई तो उनका कहना है कि मेरे द्वारा विभाग को इसकी जानकारी लिखित में दे दिया हुं लेकिन अभी भी विभाग ने पूर्व अधीक्षक पर कोई कार्रवाई नहीं किया है ना ही मुझे गैस कनेक्शन संबंधित कोई दस्तावेज दिया गया है सिर्फ दो गैस सिलेंडर ही दिया गया है।और इन गैस सिलेंडर की रिफिलिंग कहां कराऊं समझ में नहीं आ रहा है क्योंकि गैस कनेक्शन नहीं होने के कारण मजबूरी में गैस सिलेंडर ब्लैक में खरीद रहा हूं। जो बहुत मंहग पड़ता है। यदि कोई दुर्घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारीकिसकी होगी।
नोट: संबंधित पक्षों का जवाब प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।








