बिछुआ के जंगलों में सागौन कटाई का आरोप, जंगल में ही बनाई जा रहीं लकड़ी की सिल्लियां
दस बीटों में अवैध कटाई की शिकायत, रात के अंधेरे में लकड़ी परिवहन की आशंका; वन विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
छिंदवाड़ा/बिछुआ। पूर्व वनमंडल छिंदवाड़ा के बिछुआ वन परिक्षेत्र में सागौन के पेड़ों की कथित अवैध कटाई का मामला सामने आया है। स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारी और विभागीय सूत्रों के दावों के अनुसार, क्षेत्र की कई बीटों में पेड़ों की कटाई कर जंगल के भीतर ही लकड़ी की सिल्लियां तैयार की जा रही हैं। आरोप है कि अंधेरा होने के बाद इन सिल्लियों को जंगल से बाहर ले जाया जाता है। यदि इन शिकायतों की पुष्टि होती है, तो यह वन सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।
पानाथावड़ी, सुरंगी, गढ़िया, पलोरा और बोरिया सहित आसपास के वन क्षेत्रों में सागौन कटाई की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, बिछुआ रेंज की कई बीटों में अवैध कटाई की गतिविधियां होने की आशंका है। हालांकि, कटाई की वास्तविक स्थिति, नुकसान का आकलन और इसमें शामिल लोगों की पहचान की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

जंगल के भीतर सिल्लियां तैयार करने का आरोप
जानकारी के अनुसार, कथित तौर पर पेड़ों की कटाई के बाद जंगल के भीतर ही लकड़ियों को छोटे और परिवहन योग्य टुकड़ों में बदला जा रहा है। इसके बाद उन्हें बाहर ले जाने की आशंका जताई जा रही है। इस तरह की गतिविधियों पर समय रहते रोक नहीं लगी, तो वन संपदा को नुकसान पहुंच सकता है। मामले में वन विभाग की ओर से नियमित गश्त, निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों की जांच की आवश्यकता है।
वन चौकियों की निगरानी पर सवाल
स्थानीय लोगों के हवाले से दावा किया गया है कि वन चौकियों पर कर्मचारियों की मौजूदगी नियमित नहीं रहती। वहीं, वन अमले के मुख्यालय में रहने और रात्रिकालीन गश्त की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच कर यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि संबंधित क्षेत्रों में कर्मचारियों की तैनाती, गश्त और निगरानी की व्यवस्था किस स्थिति में है।
इन कक्ष क्रमांकों में कटाई की शिकायत
विभागीय सूत्रों के अनुसार, पानाथावड़ी, सुरंगी, गढ़िया और बोरिया क्षेत्र के कक्ष क्रमांक 1510, 1511, 1506, 1546, 1543, 1544 और 1545 में अवैध कटाई की शिकायतें हैं। इन स्थानों का मौके पर निरीक्षण कर कटे हुए पेड़ों की संख्या, लकड़ी की जब्ती और वन अपराध से जुड़े अभिलेखों की जांच की जानी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
बैरियर और परिवहन निगरानी भी जांच के दायरे में
जंगल से निकलने वाले मार्गों पर बैरियर तथा निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि वन क्षेत्र से सागौन की सिल्लियों का अवैध परिवहन हो रहा है, तो संबंधित मार्गों, गश्ती दलों और जांच व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है। वन विभाग को शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करते हुए यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि अब तक कितने वन अपराध दर्ज हुए हैं और कितनी लकड़ी जब्त की गई है।
रेंजर ने कार्रवाई का दिया आश्वासन
करिश्मा शेख, रेंजर बिछुआ ने बताया, “बिछुआ में अवैध कटाई की जानकारी मिलने के बाद तस्करों पर कार्रवाई की जाएगी। रात में गश्ती जारी है।”
अब देखना होगा कि वन विभाग शिकायतों के आधार पर मौके की जांच कर क्या कार्रवाई करता है। साथ ही, कथित अवैध कटाई पर रोक लगाने के लिए निगरानी व्यवस्था को कितना प्रभावी बनाया जाता है।








