Home CITY NEWS वीसी और बैठकों में व्यस्त अधिकारी, गांवों की समस्याएं लंबित!

वीसी और बैठकों में व्यस्त अधिकारी, गांवों की समस्याएं लंबित!

वीसी और बैठकों में व्यस्त अधिकारी, गांवों की समस्याएं लंबित!

जिला पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, शंकरपुर की सड़क और सांवलाढाना के जर्जर आंगनबाड़ी भवन को लेकर नाराजगी

छिंदवाड़ा। जिला पंचायत की कार्यप्रणाली, अधिकारियों की उपलब्धता और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर एक जनप्रतिनिधि/अधिकारी ने नाराजगी जताते हुए प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि जिला पंचायत के अधिकारी समय पर उपलब्ध नहीं रहते और बैठकों व वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में व्यस्त रहने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं का समय पर निराकरण नहीं हो पा रहा है।

उन्होंने कहा कि जिला पंचायत में आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। प्रशासनिक व्यवस्था केवल वीसी और बैठकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि अधिकारियों को ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर जमीनी स्थिति का निरीक्षण भी करना चाहिए।

आजादी के करीब 80 साल बाद भी सड़क बदहाल

ग्रामीण सड़कों की स्थिति को लेकर उन्होंने सांवलाढाना ग्राम पंचायत के शंकरपुर गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि आजादी के लगभग 80 वर्ष बाद भी गांव की सड़क की स्थिति बेहद खराब है। खराब सड़क के कारण ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने इसी क्षेत्र में हाल ही में एक बच्ची की सर्पदंश से हुई मौत का उल्लेख करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क और आपातकालीन आवागमन की सुविधा की जरूरत बताई। उनका कहना है कि ग्रामीण सड़क केवल आने-जाने का माध्यम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और आपातकालीन सेवाओं से भी सीधे जुड़ी है।

आपात स्थिति में सड़क बन सकती है बड़ी बाधा

ग्रामीण क्षेत्रों में यदि सड़क खराब हो तो बीमार व्यक्ति, गर्भवती महिला या दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन सकता है। ऐसे में ग्रामीण सड़कों की स्थिति को प्राथमिकता के आधार पर सुधारने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि विकास के दावों के बीच उन गांवों की वास्तविक स्थिति भी देखी जानी चाहिए, जहां आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए ग्रामीणों को परेशान होना पड़ रहा है।

जर्जर आंगनबाड़ी भवन से बच्चों की सुरक्षा पर सवाल

इसी क्रम में सांवलाढाना क्षेत्र के आंगनबाड़ी भवन की जर्जर स्थिति का मुद्दा भी उठाया गया। बताया गया कि भवन काफी खराब हालत में है और उसके आसपास की मिट्टी बह जाने के कारण संरचना की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।

आंगनबाड़ी केंद्रों में छोटे बच्चों की गतिविधियां संचालित होती हैं। ऐसे में भवन की जर्जर स्थिति को नजरअंदाज करना बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर विषय हो सकता है। मांग की गई है कि संबंधित विभाग तत्काल भवन का निरीक्षण कराए और आवश्यकता के अनुसार मरम्मत अथवा नए भवन की व्यवस्था करे।

‘कागजों और बैठकों तक सीमित न रहें अधिकारी’

जनप्रतिनिधि ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली शिकायतों और जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों को केवल कागजों एवं बैठकों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। अधिकारियों को मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए और समस्याओं के निराकरण के लिए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अधिकारियों की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले समय में वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

अब सवाल यह है कि शंकरपुर की बदहाल सड़क और सांवलाढाना के जर्जर आंगनबाड़ी भवन को लेकर प्रशासन कब मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेता है और ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।

टीप: सर्पदंश से बच्ची की मौत तथा अन्य स्थानीय घटनाओं से संबंधित तथ्य संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड/विभागीय पुष्टि के आधार पर ही अंतिम प्रकाशन से पहले सत्यापित किए जाना उचित होगा। संबंधित अधिकारियों/विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।