गधे के नाम पर नर्सिंग रजिस्ट्रेशन! ऑनलाइन व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
250 रुपये की फीस के बाद कथित तौर पर जनरेट हुआ सर्टिफिकेट, NSUI ने उठाए सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल
भोपाल। मध्यप्रदेश में नर्सिंग पंजीयन व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आने का दावा किया गया है। NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल (MPNRC) की ऑनलाइन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि परीक्षण के दौरान “डंकी” नाम और गधे की तस्वीर के साथ आवेदन किए जाने पर कथित तौर पर नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जनरेट हो गया।
फर्जी जानकारी से किया गया कथित परीक्षण
रवि परमार के अनुसार, ऑनलाइन सिस्टम का परीक्षण करने के लिए आवेदन में आवेदक का नाम “डंकी”, पिता का नाम “डंकी फादर”, माता का नाम “डंकी मदर” और जाति “एनिमल” दर्ज की गई। प्रशिक्षण केंद्र के तौर पर भोपाल नर्सिंग कॉलेज और BMHRC भोपाल का उल्लेख किया गया।
दावा है कि आवश्यक शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण दस्तावेजों के स्थान पर दो खाली कागज अपलोड किए गए। इसके बावजूद ऑनलाइन फीस जमा करने के कुछ ही समय बाद रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट कथित तौर पर जनरेट हो गया, जिसमें रजिस्ट्रेशन नंबर और डिजिटल हस्ताक्षर भी दिखाई दिए।

अब सवाल—सत्यापन आखिर किस स्तर पर?
इस दावे के सामने आने के बाद ऑनलाइन पंजीयन व्यवस्था में आवेदक की पहचान, दस्तावेजों और पात्रता के सत्यापन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि बिना वास्तविक दस्तावेज और पहचान सत्यापन के पंजीयन प्रमाणपत्र जनरेट होना संभव है, तो व्यवस्था में मानवीय अथवा तकनीकी जांच की भूमिका कितनी प्रभावी है—यह जांच का विषय है।
मध्यप्रदेश विधानसभा के दस्तावेजों में भी MPNRC से संबंधित रिकॉर्ड, दस्तावेजों के गायब होने और शिकायतों/FIR से जुड़े सवाल पहले उठाए जा चुके हैं।
NSUI ने की जांच और ऑडिट की मांग
NSUI ने पूरे मामले की तकनीकी एवं प्रशासनिक जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों/कर्मचारियों की भूमिका तय करने तथा जरूरत पड़ने पर FIR दर्ज कराने की मांग की है। संगठन ने काउंसिल से जारी पंजीयनों का ऑडिट कर संदिग्ध पंजीयनों की जांच की मांग भी उठाई है।
साथ ही MP Online की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग की गई है। परमार के मुताबिक, MPNRC अध्यक्ष बीनू कुशवाह से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
पक्ष प्राप्त होने पर खबर में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
यह संस्करण आपके अखबार के लिए जबरदस्त हेडलाइन + सवालिया एंगल रखता है, लेकिन बिना स्वतंत्र पुष्टि के सीधे “फर्जी सर्टिफिकेट जारी कर दिया” को तथ्य की तरह पेश नहीं करता।








