इमलीखेड़ा चौक की घटना पर सोशल मीडिया खबरों से माहोरे कलार समाज नाराज
समाज अध्यक्ष ने कहा—मूल वीडियो और पुलिस रिकॉर्ड की जांच के बाद ही सामने आए पूरी सच्चाई, युवकों की छवि प्रभावित होने का आरोप
छिंदवाड़ा। इमलीखेड़ा चौक से जुड़ी एक घटना को लेकर सोशल मीडिया के स्थानीय पेजों और न्यूज चैनलों पर प्रसारित खबरों पर क्षत्रिय माहोरे कलार समाज ने आपत्ति जताई है। सोमवार को समाज अध्यक्ष नरेंद्र माहोंरे ने प्रेस वार्ता कर पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने तथा सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों की मूल दस्तावेजों से पुष्टि करने की मांग की।
नरेंद्र माहोंरे ने बताया कि पिछले दिनों सोशल मीडिया पर तीन युवकों की तस्वीरों के साथ “छिंदवाड़ा में नकली किन्नर बनकर वाहनों से वसूली” जैसे शीर्षकों से खबरें प्रसारित हुईं। समाज का कहना है कि इस तरह की खबरों से संबंधित युवकों की पहचान कथित वसूली के आरोप से जुड़ गई और उनकी सामाजिक छवि प्रभावित होने की स्थिति बनी।
समाज अध्यक्ष के अनुसार, युवकों की ओर से दी गई जानकारी में घटनाक्रम का अलग पक्ष सामने आया है। उनका कहना है कि तीनों युवक आपस में मस्ती-मजाक के लिए भूत का रूप बनाकर वीडियो अथवा रील तैयार कर रहे थे। समाज का दावा है कि उनका किसी वाहन चालक से पैसे मांगने, वसूली करने या लूट करने का उद्देश्य नहीं था।
बताया गया कि इसी दौरान किसी व्यक्ति द्वारा पुलिस को सूचना दी गई कि कुछ लोग किन्नर बनकर वाहनों को रोक रहे हैं और पैसे की वसूली कर रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की। इसके बाद घटना को सोशल मीडिया पर अलग-अलग शीर्षकों के साथ प्रसारित किया गया। समाज का आरोप है कि सोशल मीडिया पर प्रस्तुत विवरण और युवकों द्वारा बताए जा रहे घटनाक्रम के बीच अंतर है।
तस्वीरों के इस्तेमाल पर भी उठाए सवाल
प्रेस वार्ता में समाज अध्यक्ष ने सबसे गंभीर आपत्ति युवकों की तस्वीर और पहचान को कथित वसूली के आरोप से जोड़कर प्रसारित किए जाने पर जताई। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं तो संबंधित सामग्री प्रकाशित करने से पहले पुलिस रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का सत्यापन किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि मामले से संबंधित मूल वीडियो/रील, पुलिस से जुड़े दस्तावेज तथा सोशल मीडिया पर प्रसारित खबरों के स्क्रीनशॉट और लिंक उपलब्ध हैं। समाज के अनुसार, इन दस्तावेजों की जांच से घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
तथ्य की पुष्टि के बाद ही खबर प्रसारित करने की अपील
नरेंद्र माहोंरे ने सोशल मीडिया पेजों और समाचार माध्यमों से अपील की कि वे केवल सोशल मीडिया पर उपलब्ध सूचना के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय मूल वीडियो, पुलिस रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों का पक्ष भी देखें। यदि प्रकाशित सामग्री में तथ्यात्मक त्रुटि या भ्रामक जानकारी पाई जाती है तो उसे हटाने अथवा उचित Correction प्रकाशित करने की मांग भी उन्होंने की।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की तस्वीर और पहचान के साथ बिना पर्याप्त सत्यापन के गंभीर आरोप प्रकाशित किए गए हैं और उससे उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है, तो संबंधित व्यक्ति उपलब्ध कानूनी उपायों पर विधिक परामर्श ले सकता है। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 356 तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 222 का भी उल्लेख किया।
“उद्देश्य विवाद नहीं, तथ्य सामने लाना”
समाज अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि समाज का उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या समाचार माध्यम के खिलाफ अनावश्यक विवाद खड़ा करना नहीं है। उनका कहना है कि औपचारिक कानूनी कार्रवाई से पहले संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और समाचार माध्यमों को उपलब्ध साक्ष्यों की जांच का अवसर दिया जा रहा है, ताकि यदि कहीं तथ्यात्मक गलती हुई है तो उसे सुधारा जा सके।
समाज ने मांग की है कि पूरे मामले को एकतरफा सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर नहीं, बल्कि सभी संबंधित पक्षों के बयान, मूल वीडियो और उपलब्ध पुलिस दस्तावेजों के आधार पर देखा जाए। इससे घटना की वास्तविक स्थिति सामने आने के साथ-साथ किसी निर्दोष व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित होने से भी बचाया जा सकेगा।








