करोड़ों के छात्रावास, भूमिपूजन में जनप्रतिनिधि गायब!
जनप्रतिनिधियों को दरकिनार कर गुपचुप भूमिपूजन कराने पर उठे सवाल, विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान
मोहखेड़/छिंदवाड़ा। विकासखंड मोहखेड़ के ग्राम लावाघोघरी और मनीछापा में जनजातीय कार्य विभाग द्वारा प्रस्तावित छात्रावास भवनों के निर्माण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि विभागीय अधिकारियों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों को सूचना दिए बिना ही निर्माण कार्यों का भूमिपूजन करा दिया। भूमिपूजन कार्यक्रम की सामने आई तस्वीरों ने अब विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि दोनों स्थानों पर छात्रावास भवनों के निर्माण के लिए सरकारी राशि खर्च की जानी है। ऐसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्य के भूमिपूजन कार्यक्रम में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी और उन्हें विधिवत सूचना दिए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि आखिर करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य के भूमिपूजन में जनप्रतिनिधियों को क्यों नहीं बुलाया गया?

तस्वीरों ने बढ़ाए सवाल
सामने आई तस्वीरों में कुछ लोगों द्वारा भूमिपूजन की प्रक्रिया करते हुए दिखाई देने का दावा किया गया है। वहीं दूसरी तस्वीर में भी पूजा-अर्चना की प्रक्रिया नजर आ रही है। हालांकि कार्यक्रम में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी दिखाई नहीं दे रही है। इसी को लेकर सवाल उठाया जा रहा है कि क्या भूमिपूजन कार्यक्रम की जानकारी जनप्रतिनिधियों को दी गई थी?
विधायक ने जताई नाराजगी
मामले को लेकर क्षेत्रीय विधायक नीलेश उईके द्वारा नाराजगी जताए जाने की बात सामने आई है। बताया गया कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि चाहे किसी भी दल से जुड़े हों, शासकीय आयोजनों में उन्हें आमंत्रित करना प्रोटोकॉल का हिस्सा है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों को भूमिपूजन कार्यक्रम से दूर रखने का मामला अब चर्चा का विषय बन गया है।
विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि भूमिपूजन कार्यक्रम की सूचना देने की जिम्मेदारी आखिर किस अधिकारी की थी? क्या कार्यक्रम के आयोजन से पहले जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करने की प्रक्रिया अपनाई गई थी? यदि सूचना नहीं दी गई तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी कौन हैं?
मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की जा रही है। वहीं मुख्यालय स्तर के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किए जाने की बात भी सामने आई है।
शिकायत की बात, जांच की मांग
मामले को लेकर जिला कलेक्टर से शिकायत किए जाने और पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि सरकारी राशि से होने वाले निर्माण कार्यों में पारदर्शिता के साथ निर्धारित प्रक्रिया और प्रोटोकॉल का पालन होना चाहिए।
अब बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों की लागत से बनने वाले छात्रावास भवनों के भूमिपूजन में जनप्रतिनिधियों को सूचना क्यों नहीं दी गई और यदि सूचना नहीं दी गई तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
नोट: उपरोक्त खबर में लगाए गए आरोप/दावे संबंधित पक्षों से प्राप्त जानकारी के आधार पर हैं। विभागीय पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जा सकता है।








