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छात्रावास में आधी रात ‘खौफ की पाठशाला’!जूनियर छात्रों को जलते अंगारों की कथित सजा..!

छात्रावास में आधी रात ‘खौफ की पाठशाला’!

जूनियर छात्रों को जलते अंगारों की कथित सजा, बेल्ट से पिटाई और रुपये मांगने का आरोप

दो अधीक्षक पदस्थ, फिर भी घटना की रात छात्रावास में कौन था? सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल

मंडला। पंचायत दिशा समाचार। मंडला जिले के एक छात्रावास से बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बेहद गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि आपसी विवाद के बाद तीन जूनियर छात्रों के साथ रात के समय मारपीट की गई। इतना ही नहीं, बच्चों के हाथों में कथित तौर पर जलते अंगारे रखे गए, पीठ पर बेल्ट से पिटाई की गई और उनसे रुपये मांगने का भी आरोप है। घटना किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दिए जाने की बात भी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि सोमवार की रात करीब 1 से 2 बजे के बीच तीन बच्चों के साथ यह कथित घटना हुई। घटना के बाद बच्चे भय और दहशत में रहे और करीब दो दिन तक मामला सामने नहीं आया। बाद में जब इसकी जानकारी पालकों तक पहुंची, तो उन्होंने छात्रावास प्रबंधन से संपर्क किया।

अनिल उईके हॉस्टलअधीक्षक

घटना की रात छात्रावास में नहीं थे अधीक्षक

मामले में सबसे बड़ा सवाल छात्रावास की रात्रिकालीन निगरानी व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। जानकारी के अनुसार छात्रावास में दो अधीक्षक पदस्थ हैं, लेकिन घटना वाली रात दोनों में से कोई भी छात्रावास में मौजूद नहीं था। पालकों की सूचना के बाद अधीक्षक नैनपुर स्थित अपने घर से छात्रावास पहुंचे।

बताया गया है कि अधीक्षक ने स्वयं स्वीकार किया कि घटना वाली रात वे छात्रावास में मौजूद नहीं थे। यह भी सामने आया है कि घटना की जानकारी तत्काल किसी उच्चाधिकारी को नहीं दी गई और न ही संबंधित बच्चों अथवा उनके पालकों से तत्काल संपर्क किया गया।

पालक

रसोइये और चौकीदार के भरोसे रात की व्यवस्था?

घटना के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि जिस छात्रावास में नाबालिग बच्चे रहते हैं, वहां रात के समय उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी? यदि दोनों अधीक्षक अनुपस्थित थे तो बच्चों की निगरानी कौन कर रहा था? आरोप यह भी है कि छात्रावास की रात्रिकालीन व्यवस्था रसोइये और चौकीदार के भरोसे चल रही थी।

यदि जांच में यह तथ्य सामने आता है कि अधीक्षक नियमित रूप से छात्रावास में उपस्थित नहीं रहते थे, तो यह मामला केवल मारपीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।

अरुण शुक्ला सहायक आयुक्त

सहायक आयुक्त ने गठित की जांच टीम

मामले में सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग डॉ. अरुण शुक्ला ने बताया कि घटना उनके संज्ञान में आई है। मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है, जो मौके पर पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी। अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है।

सहायक आयुक्त के अनुसार मामला बेहद संवेदनशील है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। छात्रावास के अटेंडेंस रजिस्टर की भी जांच की जाएगी। यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि अधीक्षक नियमित रूप से छात्रावास में उपस्थित नहीं रहते थे, तो उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

अब जांच में सामने आएगा पूरा सच

बच्चों के साथ कथित मारपीट, अंगारे रखने और धमकी देने जैसे आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि घटना की रात छात्रावास में बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसके पास थी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो इतनी गंभीर घटना के बावजूद विभागीय स्तर पर तत्काल सूचना क्यों नहीं दी गई?

अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर हैं। जांच में घटना की पूरी परिस्थितियां, बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था, अधीक्षकों की उपस्थिति और जिम्मेदारी तय होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की तस्वीर साफ होगी।