धनई नदी बनी गर्भवती महिला के लिए मौत का रास्ता!
प्रसव पीड़ा में महिला को पैदल नदी पार कराकर अस्पताल ले गए पति, ग्रामीण और आशा कार्यकर्ता
पुल नहीं तो हर बरसात में जिंदगी से जंग क्यों?
सिवनी/ जिले की केवलारी विधानसभा क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं और आवागमन की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही है। धनई नदी पर पुल नहीं होने के कारण प्रसव के लिए अस्पताल ले जाई जा रही एक गर्भवती महिला को परिजनों, ग्रामीणों और आशा कार्यकर्ता की मदद से पैदल नदी पार करानी पड़ी।
मामला पांडिया छपारा/उगली क्षेत्र के गुरेरा माल का बताया जा रहा है, जहां श्रीमती सोमलता मड़ावी, पति प्रदीप मड़ावी को प्रसव के लिए पांडिया छपारा ले जाना था। लेकिन नदी में पानी अधिक होने के कारण जननी एम्बुलेंस मौके तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद महिला को ग्रामीणों, पति और आशा कार्यकर्ता की मदद से नदी पार कराकर अस्पताल पहुंचाया गया।

जिस समय गर्भवती महिला को सुरक्षित और तत्काल चिकित्सा सुविधा मिलनी चाहिए, उस समय नदी के पानी के बीच से होकर अस्पताल पहुंचाने की यह तस्वीर व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
ग्रामीणों के अनुसार धनई नदी में जलस्तर बढ़ने के साथ ही क्षेत्र का आवागमन प्रभावित हो जाता है। कई बार जननी एम्बुलेंस सहित अन्य वाहन भी नदी पार नहीं कर पाते। ऐसे में गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ बुजुर्गों, बीमार लोगों और बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
यह समस्या केवल एक दिन की नहीं, बल्कि बरसात के दौरान बार-बार सामने आने वाली समस्या बताई जा रही है।
सवाल
आखिर कब तक ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर धनई नदी पार करते रहेंगे?
ग्रामीणों का कहना है कि धनई नदी पर पुल निर्माण की मांग को लेकर कई बार शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस समस्या की ओर दिलाया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बावजूद अब तक पुल निर्माण की दिशा में अपेक्षित ठोस पहल नजर नहीं आई है।
बरसात आते ही नदी का जलस्तर बढ़ता है और ग्रामीणों के सामने आवागमन का संकट खड़ा हो जाता है।
सवाल यह है कि क्या इस समस्या का स्थायी समाधान होगा, या फिर हर बरसात में ग्रामीणों को इसी तरह जोखिम उठाना पड़ेगा?
ग्रामीणों ने क्षेत्रीय सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते तथा क्षेत्रीय विधायक और संबंधित अधिकारियों से धनई नदी की समस्या का तत्काल संज्ञान लेकर पुल निर्माण की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
एक तरफ गांव-गांव तक सड़क और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रसव के लिए अस्पताल जा रही महिला को नदी पैदल पार कराने की तस्वीर सामने आना ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक चुनौती को सामने रखती है।
ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है—उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धनई नदी पर स्थायी पुल चाहिए।
अब देखना होगा कि इस घटना के बाद जिम्मेदार प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस समस्या का संज्ञान लेते हैं और ग्रामीणों को इस जोखिम से स्थायी राहत कब मिलती है








