सहायक आयुक्त के आदेश की भी अनदेखी!
अटैचमेंट खत्म कर स्कूल लौटाने के निर्देश के बाद भी बाबू पर कार्रवाई का इंतजार
तहसील कार्यालय से हटाकर वासुदेव छेरके को मूल विद्यालय तुमडागढी भेजने का दावा, अब बिछुआ बीईओ की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल..?
आखिर बाबू के मूलशाला वापस करने के आदेश के बाद आखिर क्यों नहीं किया गया वापस..?
छिंदवाड़ा/बिछुआ। जनजातीय कार्य विभाग में कर्मचारियों के लंबे समय से चले आ रहे अटैचमेंट को लेकर उठे सवालों के बीच अब मामला एक कदम आगे बढ़ गया है। शिकायत मिलते ही सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग ने तहसील कार्यालय में पदस्थ बाबू वासुदेव छेरके का अटैचमेंट समाप्त कर उन्हें पुनः मूल विद्यालय तुमडागढी भेजने के निर्देश दिए हैं। सहायक आयुक्त के इस कदम के बाद अब सवाल बिछुआ विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) की कार्रवाई को लेकर उठ रहे हैं।
बताया गया है कि वासुदेव छेरके लंबे समय से शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तुमड़ागढ़ी से बाहर तहसील कार्यालय में सेवाएं दे रहे थे। मामले की शिकायत सामने आने के बाद सहायक आयुक्त ने तत्काल संज्ञान लेते हुए अटैचमेंट समाप्त कर कर्मचारी को उसके मूल विद्यालय वापस भेजने की कार्रवाई की।

आदेश के बाद भी कार्रवाई अधूरी क्यों?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अटैचमेंट समाप्त कर कर्मचारी को मूल विद्यालय वापस भेजने का निर्णय विभाग के सक्षम अधिकारी स्तर से लिया जा चुका है, तो बिछुआ बीईओ स्तर पर आगे की कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि यदि लंबे समय तक कर्मचारी मूल पदस्थापना से बाहर रहकर कार्य करता रहा, तो उसकी जिम्मेदारी तय करने और पूरे मामले की विभागीय जांच की जरूरत है या नहीं।

सहायक आयुक्त ने दिखाई सख्ती, अब बीईओ की बारी
मामले में सहायक आयुक्त की तत्काल कार्रवाई ने यह स्पष्ट किया है कि शिकायत सामने आने के बाद विभाग ने इसे गंभीरता से लिया। लेकिन अब निगाहें बिछुआ बीईओ पर हैं कि वे सहायक आयुक्त के निर्देशों के अनुरूप अभिलेखों की जांच, जिम्मेदारी तय करने और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई कब करते हैं।
13 साल के अटैचमेंट का हिसाब कौन देगा?
यदि वर्ष 2013 से कर्मचारी के तहसील कार्यालय में अटैचमेंट का दावा सही पाया जाता है, तो यह सामान्य अटैचमेंट का नहीं बल्कि लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था की जांच का विषय बन जाता है। सवाल यह भी है कि इतने वर्षों तक कर्मचारी की मूल पदस्थापना, अटैचमेंट आदेश और उसकी अवधि की समीक्षा किस स्तर पर होती रही।
अब विभाग से यह भी अपेक्षा है कि वह स्पष्ट करे कि कर्मचारी को इतने लंबे समय तक मूल विद्यालय से बाहर रखने के लिए कौन-कौन से आदेश जारी हुए और उनकी वैधता क्या थी।
अब देखना यह है…
सहायक आयुक्त ने शिकायत मिलते ही अटैचमेंट समाप्त कर दिया, लेकिन क्या बिछुआ बीईओ भी मामले में अगला कदम उठाएंगे?
क्या 13 साल के कथित अटैचमेंट की जिम्मेदारी तय होगी?
क्या मूल विद्यालय में लिपिकीय व्यवस्था प्रभावित होने की जांच होगी?
और सबसे अहम—यदि नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदार कौन है?
इन सवालों के जवाब अब जनजातीय कार्य विभाग और बिछुआ बीईओ की आगामी कार्रवाई से ही सामने आएंगे।
रिपोर्ट/ रामकुमार राजपूत








