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कलेक्टर के निर्देश के बाद जागा खाद्य सुरक्षा विभाग?तामिया के होटल-ढाबों में जांच के दौरान खराब खाद्य सामग्री और गंदगी मिली,

कलेक्टर के निर्देश के बाद जागा खाद्य सुरक्षा विभाग?
तामिया के होटल-ढाबों में जांच के दौरान खराब खाद्य सामग्री और गंदगी मिली, कई प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई

रिपोर्ट/रामकुमार राजपूत
छिंदवाड़ा/तामिया। जिले में खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर श्री हरेंद्र नारायन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निरीक्षण के दौरान होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों एवं अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में हाईजीन अथवा गुणवत्ता संबंधी लापरवाही मिलने पर केवल समझाइश देकर मामला समाप्त न किया जाए, बल्कि नियमानुसार नोटिस एवं आवश्यक कार्रवाई भी की जाए।

संध्या मार्को खाध सुरक्षा अधिकारी

कलेक्टर के निर्देश के बाद खाद्य सुरक्षा एवं राजस्व विभाग ने की बड़ी कार्रवाई ..

कलेक्टर निर्देश के बाद खाद्य सुरक्षा एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने सोमवार को तामिया नगर के विभिन्न होटल, ढाबों और खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। कार्रवाई के दौरान कुछ प्रतिष्ठानों में खराब खाद्य सामग्री तो कहीं स्वच्छता संबंधी गंभीर कमियां सामने आने की जानकारी खाद्य सुरक्षा विभाग ने दी है।


प्रशांत ढाबे में खराब सामग्री मिलने का दावा..
खाद्य सुरक्षा अधिकारी संध्या मार्को के अनुसार मुख्य मार्ग स्थित प्रशांत ढाबे के निरीक्षण के दौरान खड़ी लाल मिर्च, चॉकलेट और करीब एक किलो छोले खराब स्थिति में पाए गए। टीम द्वारा संबंधित खाद्य सामग्री को लेकर नियमानुसार कार्रवाई की गई।
इसके समीप स्थित जय भोले ढाबे के निरीक्षण में फफूंद लगा नमकीन, पनीर, दूध सहित अन्य खाद्य सामग्री में भी गुणवत्ता संबंधी कमियां मिलने की जानकारी दी गई। विभाग ने मामले में कार्रवाई की।
एक होटल में भारी गंदगी, तीन दिन बंद रखकर सफाई के निर्देश
बस स्टैंड स्थित शेख रमजान की होटल में निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई। खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने होटल संचालक को तीन दिन होटल बंद रखकर सफाई कराने के निर्देश दिए। वहीं अंकिता रेस्टोरेंट के निरीक्षण में टीम को कोई प्रमुख कमी नहीं मिलने की बात सामने आई।



ठेले और छोटे खाद्य कारोबारियों को भी दिए निर्देश
टीम ने गुपचुप, अंडे, नाश्ता एवं अन्य खाद्य सामग्री बेचने वाले ठेले वालों को भी साफ-सफाई रखने तथा खाद्य सामग्री को सुरक्षित तरीके से रखने की समझाइश दी। खाद्य पदार्थों की पैकिंग अथवा परोसने में रद्दी कागज का इस्तेमाल नहीं करने के निर्देश दिए गए।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने छोटे खाद्य कारोबारियों को खाद्य लाइसेंस बनवाने की जानकारी भी दी तथा बताया कि फूड लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।
बड़ा सवाल—नियमित निगरानी आखिर कितनी प्रभावी?
कलेक्टर के निर्देश के बाद हुई इस कार्रवाई ने जिले में खाद्य प्रतिष्ठानों की नियमित निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि निरीक्षण के दौरान खराब खाद्य सामग्री और स्वच्छता संबंधी कमियां सामने आ रही हैं, तो सवाल यह है कि क्या ऐसे प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण पहले भी किया जा रहा था?
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों और निरीक्षकों की लंबे समय से एक ही जिले में पदस्थापना को लेकर भी चर्चा होती रही है। ऐसे में विभागीय स्तर पर यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि संबंधित अधिकारियों की वर्तमान एवं पूर्व पदस्थापना अवधि क्या है, पिछले वर्षों में कितने निरीक्षण किए गए, कितने नमूने लिए गए और कितने मामलों में नियमानुसार कार्रवाई हुई।


केवल निर्देश के बाद कार्रवाई या नियमित निगरानी भी होगी?
कलेक्टर द्वारा स्वयं यह निर्देश दिया जाना कि “केवल हिदायत देने तक सीमित न रहें, नियमानुसार कार्रवाई भी करें”, विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि तामिया में हुई कार्रवाई एक नियमित अभियान का हिस्सा बनती है या फिर कलेक्टर के निर्देश तक ही सीमित रहती है।
विभागीय अधिकारियों का पक्ष: खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई और संबंधित प्रतिष्ठानों पर की गई नियमानुसार कार्रवाई का विस्तृत पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।