छात्रावासों में मलेरिया का संकट, आदिवासी बच्चों की सेहत पर सवाल
हर्रई-तामिया के छात्रावासों में मलेरिया से संक्रमित मिले विद्यार्थी, अधीक्षकों को फटकार; कलेक्टर ने दिए कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश
छात्रावासों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और विद्यार्थियों की नियमित जांच नहीं होने के आरोपों ने बढ़ाई चिंता, आखिर कब होगी जिम्मेदारों पर कार्रवाई?
छिंदवाड़ा। जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित आदिवासी छात्रावासों में विद्यार्थियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हर्रई और तामिया विकासखंड के कुछ आदिवासी छात्रावासों में निवासरत विद्यार्थियों के मलेरिया से संक्रमित मिलने का मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान सामने आए इस मामले को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर हरेंद्र नारायण ने संबंधित छात्रावासों के अधीक्षकों को फटकार लगाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में सामने आया मामला
जानकारी के अनुसार, बीते दिनों स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान हर्रई और तामिया विकासखंड के कुछ आदिवासी छात्रावासों में निवासरत विद्यार्थियों के मलेरिया से संक्रमित होने की जानकारी सामने आई। छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को लेकर सामने आई इस स्थिति ने विभागीय व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आदिवासी छात्रावासों में दूर-दराज के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों से विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने के लिए निवास करते हैं। ऐसे में उनकी नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर उपचार और संक्रमण की स्थिति में आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण माना जाता है। विद्यार्थियों के मलेरिया से संक्रमित मिलने के बाद इन व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
कलेक्टर ने लगाई फटकार, नोटिस के निर्देश
मंगलवार को कलेक्टर सभा कक्ष में आयोजित समय सीमा के प्रकरणों की साप्ताहिक समीक्षा बैठक में इस मामले को लेकर चर्चा हुई। समीक्षा के दौरान कलेक्टर हरेंद्र नारायण ने मलेरिया प्रभावित छात्रावासों के अधीक्षकों को फटकार लगाई तथा संबंधित अधीक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अब संबंधित छात्रावासों की व्यवस्थाओं और विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को लेकर विभागीय स्तर पर जवाबदेही तय होने की उम्मीद है। हालांकि, नोटिस में क्या-क्या सवाल उठाए जाएंगे और संबंधित अधीक्षकों का क्या जवाब सामने आता है, यह आगामी कार्रवाई के बाद स्पष्ट होगा।
नियमित स्वास्थ्य जांच पर उठे सवाल
छात्रावासों में विद्यार्थियों की नियमित स्वास्थ्य जांच होती है या नहीं, मलेरिया के लक्षण सामने आने पर तत्काल स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी जाती है या नहीं और संक्रमित विद्यार्थियों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया गया या नहीं—इन सवालों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।
यदि छात्रावासों में स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था नियमित नहीं है, तो संक्रमण की पहचान में देरी हो सकती है। ऐसे में विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए विभाग को आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा करनी होगी। मलेरिया प्रभावित छात्रावासों में स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा जांच, उपचार और रोकथाम की व्यवस्थाओं की जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
आखिर कब होगी स्थायी व्यवस्था?
आदिवासी विद्यार्थियों के लिए सरकार द्वारा छात्रावासों में रहने और शिक्षा की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण मिलना भी व्यवस्था की जिम्मेदारी का हिस्सा है। मलेरिया संक्रमण के मामले सामने आने के बाद अब सवाल यह है कि क्या संबंधित छात्रावासों में नियमित स्वास्थ्य जांच, स्वच्छता और मच्छरजनित बीमारियों से बचाव के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?
प्रशासन की कार्रवाई के बाद अब निगाहें विभागीय जवाबदेही और आगे की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर टिकी हैं।
इन सवालों के जवाब जरूरी
- क्या हर्रई और तामिया के सभी छात्रावासों में विद्यार्थियों की नियमित स्वास्थ्य जांच हो रही है?
- मलेरिया से संक्रमित मिले विद्यार्थियों को समय पर उपचार और आवश्यक चिकित्सा सुविधा मिली या नहीं?
- संबंधित छात्रावासों में मच्छरों से बचाव और स्वच्छता की क्या व्यवस्था है?
- क्या कारण बताओ नोटिस के बाद जिम्मेदारों पर आगे कोई कार्रवाई होगी?
- क्या जनजातीय कार्य विभाग और स्वास्थ्य विभाग मिलकर सभी छात्रावासों की स्वास्थ्य जांच कराएंगे?
नोट: यह खबर जिला प्रशासन की समीक्षा में सामने आए मामले और कलेक्टर के निर्देशों पर आधारित है। संक्रमित विद्यार्थियों की संख्या, छात्रावासों के नाम, जांच रिपोर्ट और उपचार की स्थिति की आधिकारिक जानकारी प्राप्त होने पर खबर को और विस्तृत किया जा सकता है।








