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तीजा पर्व: सुहाग की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए महिलाएं रखती हैं व्रत

तीजा पर्व: सुहाग की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए महिलाएं रखती हैं व्रत

भारतीय परंपरा में तीजा का विशेष महत्व, पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना के साथ मनाया जाता है पर्व

रिपोर्ट रामकुमार राजपूत

छिंदवाड़ा। भारतीय संस्कृति और परंपराओं में तीजा पर्व का विशेष महत्व है। यह पर्व महिलाओं के लिए आस्था, प्रेम, समर्पण और पारिवारिक खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। तीजा के अवसर पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के प्रेम एवं दांपत्य जीवन के आदर्शों से जुड़ा हुआ है।

भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ी है मान्यता

तीजा पर्व को हरतालिका तीज के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। माता पार्वती की इसी श्रद्धा और तपस्या की स्मृति में महिलाएं तीजा का व्रत रखती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की जाती है।

पति की दीर्घायु के लिए रखती हैं निर्जला व्रत

तीजा पर्व पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। कई महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत भी रखती हैं, जिसमें अन्न और जल का सेवन नहीं किया जाता। हालांकि व्रत रखने की परंपरा और नियम अलग-अलग क्षेत्रों एवं परिवारों में भिन्न हो सकते हैं। महिलाएं अपनी श्रद्धा और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत रखती हैं।

सोलह श्रृंगार और पूजा का विशेष महत्व

तीजा पर्व पर महिलाएं नए वस्त्र पहनकर सोलह श्रृंगार करती हैं। हाथों में मेहंदी रचाने के साथ ही चूड़ियां, बिंदी और अन्य सुहाग सामग्री धारण करती हैं। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर कथा सुनती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना करती हैं और एक-दूसरे को तीजा पर्व की शुभकामनाएं देती हैं।

मायके से आती है तीजा की सौगात

भारतीय परंपरा में तीजा पर्व का एक महत्वपूर्ण पहलू मायके से जुड़ा हुआ है। कई परिवारों में बेटियों और बहनों को तीजा के अवसर पर नए कपड़े, श्रृंगार सामग्री, मिठाई और अन्य उपहार भेजे जाते हैं। इसे स्नेह, सम्मान और पारिवारिक रिश्तों की मजबूती का प्रतीक माना जाता है। इस परंपरा से मायके और ससुराल के बीच प्रेम एवं अपनापन और मजबूत होता है।

महिलाओं के लिए आस्था और मिलन का पर्व

तीजा केवल धार्मिक व्रत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के सामाजिक और पारिवारिक जीवन में भी विशेष स्थान रखता है। इस अवसर पर महिलाएं एकत्रित होकर पूजा करती हैं, गीत गाती हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करती हैं। पर्व के माध्यम से भारतीय संस्कृति, पारिवारिक संस्कार और आपसी प्रेम की परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती है।

बदलते समय में भी कायम है परंपरा

आधुनिक समय में जीवनशैली में बदलाव के बावजूद तीजा पर्व के प्रति महिलाओं की आस्था बनी हुई है। महिलाएं अपनी सुविधानुसार पूजा और व्रत की परंपराओं का पालन कर रही हैं। तीजा पर्व भारतीय नारी की श्रद्धा, परिवार के प्रति प्रेम और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनकर आज भी मनाया जा रहा है।