भोजन की निगरानी से आगे बढ़ेगा प्रशासन? छात्रावासों के अटैचमेंट, निर्माण और खर्चों की जांच पर उठे सवाल
10-15 साल से अटैच शिक्षकों को अधीक्षक की जिम्मेदारी दिए जाने के दावों की समीक्षा की मांग, मरम्मत और खरीदी का भौतिक सत्यापन जरूरी
पांढुर्णा। जिले के छात्रावासों एवं आश्रम शालाओं में विद्यार्थियों को भोजन, आवास, बिस्तर, फर्नीचर, पुस्तकालय, खेल सामग्री और कंप्यूटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए शासन स्तर से विभिन्न व्यवस्थाएं की जाती हैं। प्रशासन द्वारा वर्तमान में भोजन की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की उपस्थिति की निगरानी पर विशेष जोर दिया जा रहा है। हालांकि, इसी के साथ छात्रावासों की समग्र व्यवस्था, वित्तीय पारदर्शिता और लंबे समय से चले आ रहे अटैचमेंट की समीक्षा की मांग भी उठ रही है।
बताया गया है कि कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ के निर्देश पर जिले में संचालित 16 छात्रावासों एवं आश्रमों की व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग की जा रही है। 11 अगस्त 2026 को छात्रावास एवं आश्रमों के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया, जिसमें भोजन के समय विद्यार्थियों की तस्वीर, भोजन की गुणवत्ता और उपस्थिति संबंधी जानकारी साझा किए जाने की व्यवस्था की गई है। वहीं 20 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक में भी छात्रावास एवं आश्रमों की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए।
डाइनिंग टेबल होने के बाद भी नीचे बैठकर भोजन करने को मजबूर छात्र
छात्रावासों में व्यवस्थाओं पर सवाल, तीन-तीन चपरासी पदस्थ होने के बावजूद बच्चों से कराया जा रहा खाना परोसने का काम
जिले के शासकीय छात्रावासों में बच्चों की सुविधाओं और व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। छात्रावासों में डाइनिंग टेबल उपलब्ध होने के बावजूद कई जगह बच्चे आज भी जमीन पर बैठकर भोजन करने के लिए मजबूर नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं, भोजन परोसने की जिम्मेदारी भी बच्चों से कराए जाने की तस्वीरें सामने आई हैं।
बताया जा रहा है कि एक-एक छात्रावास में तीन-तीन चपरासी पदस्थ हैं, जिनका काम छात्रावास की आवश्यक व्यवस्थाओं में सहयोग करना है। इसके बावजूद यदि बच्चों से ही भोजन परोसने का काम कराया जा रहा है, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
फोटो में दिखी व्यवस्था ने खोली पोल..!
सामने आई तस्वीरों में छात्र जमीन पर बैठकर भोजन करते दिखाई दे रहे हैं, जबकि छात्रावास में डाइनिंग टेबल मौजूद हैं। वहीं कुछ बच्चे अन्य छात्रों को भोजन परोसते हुए नजर आ रहे हैं। सवाल यह है कि जब छात्रावास में पर्याप्त सहायक कर्मचारी पदस्थ हैं, तो बच्चों से यह काम क्यों कराया जा रहा है?

जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी पर भी सवाल..!
छात्रावासों में रहने वाले बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए शासन द्वारा बजट और संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं। ऐसे में डाइनिंग व्यवस्था का उपयोग नहीं होना और बच्चों से भोजन परोसवाना छात्रावास प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
अब देखना यह है कि जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी इन तस्वीरों और छात्रावासों की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कर जिम्मेदारों से जवाब-तलब करते हैं या फिर यह व्यवस्था इसी तरह चलती रहेगी। विभाग को छात्रावासों का भौतिक सत्यापन कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चों को निर्धारित सुविधाएं मिल रही हैं और उनसे ऐसे कार्य नहीं कराए जा रहे हैं, जो कर्मचारियों की जिम्मेदारी हैं।
भोजन की निगरानी के साथ पूरी व्यवस्था की जांच जरूरी
भोजन और उपस्थिति की निगरानी को व्यवस्था सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है, लेकिन छात्रावासों की जवाबदेही केवल भोजन और उपस्थिति तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों को शासन की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली शिक्षा, आवास, भोजन, बिस्तर, फर्नीचर, पुस्तकालय, खेल सामग्री, कंप्यूटर शिक्षा तथा अन्य सुविधाओं की उपलब्धता और उपयोग की भी समय-समय पर समीक्षा जरूरी है।
विशेष रूप से उत्कृष्ट छात्रावासों में विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के लिए पुस्तकालय, कंप्यूटर लैब, अतिरिक्त कक्षाएं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जैसी व्यवस्थाओं का दावा किया जाता है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये सुविधाएं कागजों के साथ-साथ धरातल पर भी कितनी प्रभावी हैं।
वर्षों पुराने अटैचमेंट की समीक्षा की मांग
छात्रावासों की व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा शिक्षकों के लंबे समय से चले आ रहे अटैचमेंट को लेकर भी सामने आ रहा है। दावा है कि कुछ शिक्षक वर्षों से अपनी मूल पदस्थापना से अलग रहकर छात्रावासों या आश्रमों में अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
इन दावों की वास्तविकता स्पष्ट करने के लिए संबंधित शिक्षकों के मूल पदस्थापन, अटैचमेंट आदेश, आदेश की अवधि और समय-समय पर हुए नवीनीकरण की विभागीय स्तर पर समीक्षा की जा सकती है। यदि किसी मामले में नियमों के विपरीत स्थिति सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता भी साफ हो सकता है।
दो वर्षों के मरम्मत एवं निर्माण कार्यों का हो भौतिक सत्यापन
छात्रावास एवं आश्रम शालाओं में पिछले दो वर्षों के दौरान मरम्मत, निर्माण तथा अन्य कार्यों पर खर्च की गई राशि को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में संबंधित अधिकारियों द्वारा स्वीकृत राशि, कार्यादेश, अनुमानित लागत, भुगतान, बिल-वाउचर और मौके पर हुए वास्तविक कार्य का मिलान कराया जाना पारदर्शिता की दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा।
यदि किसी कार्य की गुणवत्ता को लेकर शिकायत प्राप्त होती है तो तकनीकी अधिकारियों के माध्यम से उसका भौतिक सत्यापन कराया जा सकता है। जांच में कोई अनियमितता सामने आने पर संबंधित व्यक्ति या एजेंसी की जिम्मेदारी नियमानुसार निर्धारित की जा सकती है।
पुस्तकालय, खेल सामग्री और फर्नीचर की भी हो जांच
छात्रावासों में विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय, खेल सामग्री, फर्नीचर, बिस्तर और अन्य आवश्यक सामग्री के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली राशि के उपयोग का भी सत्यापन जरूरी है।
इसके लिए स्टॉक रजिस्टर, खरीदी संबंधी दस्तावेज, बिल-वाउचर और मौके पर उपलब्ध सामग्री का मिलान किया जा सकता है। इससे यह स्पष्ट होगा कि अभिलेखों में दर्ज सामग्री वास्तव में छात्रावासों में उपलब्ध है या नहीं और विद्यार्थियों को उसका लाभ मिल रहा है या नहीं।
कंप्यूटर शिक्षा और अतिरिक्त कक्षाओं पर भी नजर
उत्कृष्ट बालक एवं कन्या छात्रावासों में कंप्यूटर शिक्षा तथा अन्य शैक्षणिक गतिविधियों की व्यवस्था विद्यार्थियों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में कंप्यूटर की उपलब्धता, उनके उपयोग, कक्षाओं की नियमितता और विद्यार्थियों की वास्तविक भागीदारी की समीक्षा भी की जानी चाहिए।
इसी तरह अन्य छात्रावासों में विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त शैक्षणिक कक्षाएं संचालित हो रही हैं या नहीं, इसकी भी जानकारी ली जा सकती है।
केवल फोटो नहीं, रिकॉर्ड और मौके का मिलान भी
भोजन और उपस्थिति की फोटो के माध्यम से रोजाना मॉनिटरिंग व्यवस्था निश्चित रूप से निगरानी को मजबूत कर सकती है। लेकिन छात्रावास व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग के साथ दस्तावेजी और भौतिक सत्यापन भी जरूरी है।
यदि प्रशासन छात्रावासों की समग्र समीक्षा करता है तो अटैचमेंट, मरम्मत एवं निर्माण कार्य, खरीदी, स्टॉक, पुस्तकालय, खेल सामग्री, कंप्यूटर शिक्षा और विद्यार्थियों को मिलने वाली अन्य सुविधाओं की स्थिति एक साथ सामने आ सकती है।
कलेक्टर के सामने उठ रहे प्रमुख सवाल
वर्षों से अटैच शिक्षकों के मामलों की विभागीय समीक्षा कब होगी?
अटैचमेंट आदेशों और उनकी अवधि का सत्यापन किया जाएगा या नहीं?
पिछले दो वर्षों में हुए मरम्मत एवं निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन होगा या नहीं?
स्वीकृत राशि और वास्तविक कार्य की लागत का मिलान कराया जाएगा या नहीं?
बिल-वाउचर और मौके पर उपलब्ध सामग्री का सत्यापन होगा या नहीं?
पुस्तकालय और खेल सामग्री की उपलब्धता की जांच की जाएगी या नहीं?
उत्कृष्ट छात्रावासों में कंप्यूटर शिक्षा की वास्तविक स्थिति क्या है?
विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त शैक्षणिक कक्षाएं नियमित रूप से संचालित हो रही हैं या नहीं?
जांच में कोई अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जाएगी या नहीं?
फिलहाल भोजन और उपस्थिति की निगरानी शुरू हो चुकी है। अब निगाह इस बात पर है कि क्या प्रशासन इसी मॉनिटरिंग को आगे बढ़ाते हुए छात्रावासों की प्रशासनिक, वित्तीय और शैक्षणिक व्यवस्थाओं का भी रिकॉर्ड के आधार पर व्यापक सत्यापन कराता है।
नोट: उपरोक्त बिंदुओं में उठाए गए सवालों को जांच की मांग के रूप में रखा गया है। किसी व्यक्ति या संस्था पर अनियमितता का निष्कर्ष नहीं लगाया गया है। संबंधित विभाग/अधिकारी का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जा सकता है।








