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किसान के नाम पर खनिज कारोबार? कृषि ट्रैक्टरों के दुरुपयोग पर उठे सवाल…

किसान के नाम पर खनिज कारोबार? कृषि ट्रैक्टरों के दुरुपयोग पर उठे सवाल
कार्रवाई होते ही सामने आ जाता है ‘कृषि उपयोग’ का दावा, खनिज विभाग की कार्रवाई से उठे कई सवाल

रिपोर्ट / ठा.रामकुमार राजपूत

छिंदवाड़ा। जिले में रेत, गिट्टी और मुरम के अवैध परिवहन को लेकर खनिज विभाग की कार्रवाई के बीच अब कृषि कार्य के लिए पंजीकृत ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। सोमवार को कई लोग अपने जब्त ट्रैक्टरों को छुड़ाने की मांग लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। उनका कहना था कि खनिज विभाग ने उनके ट्रैक्टरों को अवैध खनिज परिवहन के आरोप में जब्त किया है।
कलेक्टर कार्यालय पहुंचे लोगों ने दावा किया कि वे कृषि उपज मंडी में अपनी उपज लेकर आते हैं और वापस लौटते समय अपने घरेलू निर्माण कार्य के लिए रेत, गिट्टी या मुरम लेकर जा रहे थे। उनका कहना था कि यदि उनसे नियमों का उल्लंघन हुआ है तो वे खनिज विभाग द्वारा निर्धारित जुर्माना जमा करने को तैयार हैं। लेकिन उनका आरोप है कि ट्रैक्टरों को परिवहन विभाग के सुपुर्द कर कमर्शियल उपयोग की कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है, जिससे उन पर भारी आर्थिक बोझ पड़ सकता है।


किसान’ बनकर बच निकलने का खेल?
इसी मामले ने जिले में कृषि उपयोग के नाम पर पंजीकृत ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के कथित दुरुपयोग को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आरोप है कि कुछ लोग कृषि कार्य के लिए पंजीकृत ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का इस्तेमाल रेत, गिट्टी और मुरम जैसे खनिजों के परिवहन में कर रहे हैं। कार्रवाई के दौरान पकड़े जाने पर वाहन को कृषि उपयोग का बताकर राहत लेने की कोशिश किए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
यदि आरोप सही हैं तो सवाल यह है कि कृषि के नाम पर पंजीकृत ट्रैक्टर आखिर खनिज परिवहन में कैसे और किसकी अनुमति से दौड़ रहे हैं? क्या वाहनों के दस्तावेजों की जांच के साथ उनके वास्तविक उपयोग की भी निगरानी की जा रही है?


कृषि और व्यावसायिक उपयोग के नियमों की आड़ में खेल?
वाहनों के उपयोग की श्रेणी और उससे जुड़ी अनुमति के नियम अलग-अलग होते हैं। ऐसे में कृषि कार्य के लिए पंजीकृत वाहन का व्यावसायिक रूप से खनिज परिवहन में इस्तेमाल किए जाने पर संबंधित विभागों द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
लेकिन आरोपों के बीच एक बड़ा सवाल यह भी है कि यदि कोई व्यक्ति वास्तव में कृषि कार्य के लिए पंजीकृत ट्रैक्टर का इस्तेमाल लगातार खनिज परिवहन में कर रहा है तो सिर्फ उसे ‘किसान का ट्रैक्टर’ बताने से उसे नियमों से छूट कैसे मिल सकती है?
खनिज माफिया पर शिकंजा या किसानों पर बोझ?
जिले में अवैध खनिज परिवहन रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन कार्रवाई में वास्तविक किसान और अवैध खनिज परिवहन करने वालों के बीच अंतर करना भी उतना ही जरूरी है। यदि कोई किसान निजी घरेलू काम के लिए सीमित मात्रा में सामग्री लेकर जा रहा था, तो उसके मामले में परिस्थितियों और दस्तावेजों की जांच जरूरी है। वहीं यदि कोई वाहन नियमित रूप से खनिज परिवहन में इस्तेमाल हो रहा है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
किसानों की मांग है कि उनके मामलों की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार राहत दी जाए। वहीं आम लोगों का सवाल है कि कृषि पंजीयन की आड़ में खनिज परिवहन करने वाले वास्तविक लोगों की पहचान कब होगी?
अब निगाहें खनिज और परिवहन विभाग की कार्रवाई पर हैं कि क्या जिले में कृषि उपयोग के नाम पर चल रहे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के वास्तविक उपयोग की जांच की जाएगी या कार्रवाई केवल पकड़े जाने के बाद जुर्माना वसूलने तक सीमित रहेगी।