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करोड़ों की नई बिल्डिंग में पहली बारिश में सीवेज और दरारें!कन्या शिक्षा परिसर के निर्माण में गुणवत्ता पर गंभीर सवाल, निगरानी व्यवस्था पर भी उठी उंगली..

करोड़ों की नई बिल्डिंग में पहली बारिश में सीवेज और दरारें!
कन्या शिक्षा परिसर के निर्माण में गुणवत्ता पर गंभीर सवाल, निगरानी व्यवस्था पर भी उठी उंगली

रिपोर्ट/ठा.रामकुमार राजपूत
छिंदवाड़ा। आदिवासी समाज के बच्चों को बेहतर शिक्षा और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए मध्यप्रदेश सरकार करोड़ों रुपये की राशि खर्च कर रही है। लेकिन जिला मुख्यालय स्थित कन्या शिक्षा परिसर में निर्माणाधीन भवन की हालत ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि भवन का निर्माण अभी पूरी तरह से पूरा भी नहीं हुआ है और पहली बारिश में ही भवन के कई हिस्सों में सीवेज की समस्या और जगह-जगह दरारें दिखाई देने लगी हैं। निर्माणाधीन भवन की ऐसी स्थिति सामने आने के बाद निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।


पहली बारिश में ही खुल गई निर्माण की पोल
स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरें और शिकायतें यह सवाल खड़ा कर रही हैं कि जिस भवन को लंबे समय तक बच्चों के उपयोग में आना है, वह निर्माण पूरा होने से पहले ही बारिश का दबाव क्यों नहीं झेल पा रहा है? यदि भवन में अभी से सीवेज और दरारों की समस्या सामने आ रही है तो आने वाले वर्षों में इसकी स्थिति क्या होगी, यह बड़ा सवाल है।


इंजीनियर की निगरानी पर उठे सवाल
निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और मौके पर निर्माण सामग्री एवं कार्य की निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित तकनीकी अधिकारियों की होती है। ऐसे में जनजातीय कार्य विभाग के सहायक यंत्री दीपक सरेयाम की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच होना आवश्यक है।
सवाल यह भी है कि निर्माण के दौरान इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता, नींव से लेकर दीवार, छत, प्लास्टर और जल निकासी व्यवस्था की तकनीकी जांच किस स्तर पर की गई? यदि विभागीय अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण किया गया था, तो निर्माण पूरा होने से पहले ही ऐसी खामियां सामने कैसे आ गईं?


सरकारी धन की बर्बादी का कौन होगा जिम्मेदार?
सरकार आदिवासी बच्चों के लिए बेहतर भवन और सुविधाएं उपलब्ध कराने के नाम पर बड़ी राशि स्वीकृत करती है। यदि निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ है या मानकों की अनदेखी की गई है, तो इसका सीधा नुकसान सरकारी खजाने और विद्यार्थियों को उठाना पड़ेगा।
ऐसे में जिला प्रशासन और जनजातीय कार्य विभाग से मांग उठ रही है कि कन्या शिक्षा परिसर के निर्माणाधीन भवन की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए। निर्माण में इस्तेमाल सामग्री के नमूने लेकर प्रयोगशाला जांच कराई जाए, स्वीकृत ड्राइंग-डिजाइन एवं तकनीकी मापदंडों से मौके के निर्माण का मिलान किया जाए और यदि अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
बड़ा सवाल—निर्माण पूरा होने से पहले ही दरारें क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब भवन अभी बनकर तैयार भी नहीं हुआ, तो उसमें सीवेज और दरारों की समस्या कैसे शुरू हो गई? क्या निर्माण में गुणवत्ता से समझौता किया गया? क्या निर्माण स्थल का नियमित निरीक्षण हुआ? क्या विभागीय अधिकारियों ने निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता की जांच की?
इन सवालों के जवाब अब जनजातीय कार्य विभाग और जिला प्रशासन को देना चाहिए। सरकारी धन से बनने वाले भवन में यदि शुरुआती दौर में ही गंभीर खामियां सामने आती हैं तो इसकी जिम्मेदारी तय करना बेहद जरूरी है।