बगिया के नाम पर कर्ज का बोझ!
‘एक बगिया मां के नाम’ ने तामिया की महिलाओं को दिखाया आत्मनिर्भरता का सपना, अब उधार चुकाने के लिए दर-दर की ठोकरें
103 बगिया स्वीकृत, भुगतान की रफ्तार पर सवाल; अधिकारी बोले—बजट आते ही होगा भुगतान
छिंदवाड़ा/तामिया।
जिस योजना को ग्रामीण महिलाओं के हाथ मजबूत करने और उन्हें अपनी जमीन से स्थायी आमदनी दिलाने की पहल के तौर पर देखा गया था, वही योजना अब तामिया क्षेत्र की कई महिलाओं के लिए कर्ज और इंतजार की कहानी बनती नजर आ रही है। ‘एक बगिया मां के नाम’ के तहत महिलाओं ने अपनी जमीन पर फलदार पौधे लगाए, कुआं खुदवाया, फेंसिंग कराई और खाद सहित जरूरी सामग्री जुटाई। कई हितग्राहियों ने यह खर्च उधार लेकर किया। अब सरकारी भुगतान का इंतजार लंबा होता जा रहा है।
सपना था बगिया का, बढ़ता गया उधार
तामिया के छिंदी गांव की आबिदा बी की कहानी इस परेशानी को सामने लाती है। उनका कहना है कि पंचायत और जनपद स्तर के अधिकारियों से योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने करीब एक एकड़ जमीन पर बगिया तैयार करने का काम शुरू किया। उन्हें बताया गया था कि योजना के तहत किए गए कार्यों का भुगतान शासन से मिलेगा।
भुगतान की उम्मीद में उन्होंने कुआं, तार की फेंसिंग और खाद जैसी जरूरतों के लिए उधार लिया। लेकिन समय बीतने के बावजूद भुगतान नहीं मिलने से अब उधार चुकाने का दबाव बढ़ रहा है।

घर पहुंच रहे उधार देने वाले..!
हितग्राहियों का दावा है कि योजना में शामिल कई महिलाओं ने स्थानीय दुकानदारों और अन्य लोगों से खेती सामग्री उधार लेकर काम पूरा कराया था। अब रकम वापस मांगने के लिए दुकानदारों के चक्कर शुरू हो गए हैं।
महिलाओं का कहना है कि उनके सामने सबसे बड़ी परेशानी यह है कि बगिया से अभी आमदनी शुरू नहीं हुई और दूसरी ओर खर्च तथा उधार लगातार बढ़ रहा है। पौधों की देखभाल के लिए भी पैसा चाहिए, जबकि पहले किए गए खर्च का भुगतान ही अटका हुआ है।

103 बगिया, लेकिन भुगतान का इंतजार
जनपद पंचायत तामिया के एडिशनल प्रोग्राम ऑफिसर बद्री प्रसाद कुर्मी के मुताबिक, तामिया विकासखंड में ‘एक बगिया मां के नाम’ के 103 प्रोजेक्ट स्वीकृत किए गए हैं। योजना का भुगतान मनरेगा के माध्यम से किया जाता है। उनके अनुसार आवश्यक सामग्री के लिए करीब 25 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जबकि लगभग

30 लाख रुपये का भुगतान इस वर्ष बाकी है।
तामिया जनपद के अधिकारी का कहना है कि बजट उपलब्ध होते ही लंबित भुगतान किया जाएगा। वहीं तामिया विकासखंड में मनरेगा से जुड़े विभिन्न कार्यों का करीब 9 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित होने की जानकारी भी सामने आई है।
योजना का मकसद आत्मनिर्भरता, सवाल भुगतान पर
योजना का मूल उद्देश्य महिलाओं को उनकी जमीन पर फलदार बगिया के माध्यम से भविष्य में आय का स्थायी साधन उपलब्ध कराना है। लेकिन हितग्राहियों के सामने तत्काल सवाल बगिया से होने वाली भविष्य की कमाई से ज्यादा वर्तमान कर्ज का है।
अब निगाह इस बात पर है कि शासन की ओर से लंबित राशि कब जारी होती है और जिन महिलाओं ने भरोसे पर अपनी जेब से अथवा उधार लेकर काम कराया है, उन्हें भुगतान कब तक मिल पाता है।
बड़ा सवाल
जब योजना सरकारी है तो हितग्राही महिलाओं को भुगतान के लिए कर्ज के बोझ तले क्यों जाना पड़ रहा है?
क्या भुगतान में देरी से बगिया की देखभाल प्रभावित नहीं होगी?
और यदि पौधे खराब हुए तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
टीप: योजना के क्रियान्वयन, भुगतान और लंबित राशि को लेकर संबंधित विभाग/अधिकारियों का विस्तृत पक्ष प्राप्त होने पर उसे प्रकाशित किया गया है..








