Home CITY NEWS स्वतंत्रता दिवस से पहले थाने पहुंचीं आदिवासी छात्राएं, अधीक्षिका पर अभद्रता के...

स्वतंत्रता दिवस से पहले थाने पहुंचीं आदिवासी छात्राएं, अधीक्षिका पर अभद्रता के आरोप..

स्वतंत्रता दिवस से पहले थाने पहुंचीं आदिवासी छात्राएं, अधीक्षिका पर अभद्रता के आरोप
छात्राओं ने करीब दो घंटे तक चौकी में की नारेबाजी, अधीक्षिका को हटाने की मांग; जनजातीय कार्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल…
पूर्व अधीक्षक रजनी उईक को वापस हटाने की रखी मांग..
सहायक आयुक्त ने अनीता दाहिया को हटा दिया था ,अनीता दाहिया के पुनः अधीक्षिका बनाने की रखे मांग…

रिपोर्ट : रामकुमार राजपूत
छिंदवाड़ा। आजादी के 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर छिंदवाड़ा में आदिवासी छात्राओं से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने जनजातीय कार्य विभाग की व्यवस्थाओं और निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कन्या शिक्षा परिसर की छात्राएं छात्रावास की अधीक्षिका के कथित अभद्र व्यवहार और प्रताड़ना से परेशान होकर धरमटेकरी चौकी पहुंचीं और उन्हें हटाने की मांग को लेकर करीब दो घंटे तक नारेबाजी की।


छात्राओं ने अधीक्षिका पर अभद्र भाषा के इस्तेमाल और परेशान करने के आरोप लगाए। छात्राओं का कहना है कि उन्हें छात्रावास में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और उनकी शिकायतों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने छात्रावास से बाहर निकलकर पुलिस चौकी का रुख किया।
छात्राओं का आरोप—‘हमें परेशान किया जाता है’
चौकी पहुंचीं छात्राओं ने आरोप लगाया कि अधीक्षिका का व्यवहार उनके प्रति उचित नहीं है। छात्राओं के मुताबिक उनके साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया जाता है और उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जाता है। छात्राओं ने स्पष्ट रूप से मांग की कि वर्तमान अधीक्षिका को हटाया जाए, ताकि छात्रावास का माहौल बेहतर हो सके।


दो घंटे तक चौकी में गूंजते रहे नारे
छात्राओं के चौकी पहुंचने के बाद काफी देर तक वहां नारेबाजी होती रही। छात्राओं ने अपनी शिकायत पुलिस के सामने रखी। पुलिस द्वारा शिकायत को रोजनामचे में दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। अब मामले में विभागीय स्तर पर जांच और कार्रवाई का इंतजार है।


प्रियंका सरेयाम क्षेत्र संयोजक जनजाति कार्य विभाग छिंदवाड़ा

आखिर छात्राओं को थाने तक क्यों पहुंचना पड़ा?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन आदिवासी छात्राओं की शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर आवासीय व्यवस्था की जिम्मेदारी जनजातीय कार्य विभाग की है, उन्हें अपनी समस्याएं लेकर पुलिस चौकी तक क्यों पहुंचना पड़ा? यदि छात्रावास स्तर पर ही छात्राओं की शिकायतों का समय पर समाधान होता, तो क्या उन्हें इस तरह विरोध करने की जरूरत पड़ती?
यह घटना विभाग की मैदानी निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। छात्रावासों में रहने वाले बच्चों की शिकायतों की नियमित समीक्षा और उनकी समस्याओं के निराकरण की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

वर्तमानअधीक्षिका ने इस पूरी धटना को बताया …

इस विषय में जब वर्तमान अधीक्षिका रजनी उईके से बात की गई तो उनका कहना है कि कि मुझे अभी वर्तमान में चार्ज भी नहीं मिला है तो खाना और छात्रों को प्रताड़ना का सवाल ही नहीं है , मेरे ऊपर जो आरोप लगे हैं वह निराधार और किसी ने बच्चों को सुनियोजित तरीके से मेरे खिलाफ थाने में भेजे गया है मेरा इस मामलों से कोई लेना देना नहीं है। और अभी मेंने चार्ज भी नहीं ली हूं । क्योंकि पुरानी अधीक्षिका ने कोर्ट से स्टे लेकर आई है। छात्राओं को स्वतंत्रता दिवस के एक दिन पहले जिस किसी ने भी थाने में पहुंचा है उसकी जांच होना चाहिए और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। आखिर छात्राएं किस की परमिशन से आश्रम निकली बाहर निकली इसकी भी जांच होना चाहिए।


अधिकारी जनविश्वास अभियान में व्यस्त, कार्रवाई का इंतजार
बताया गया कि शुक्रवार को मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत जिला स्तर के अधिकारी विभिन्न क्षेत्रों के दौरे पर थे। ऐसे में छात्राओं की शिकायत पर तत्काल विभागीय अधिकारी की मौजूदगी नहीं हो सकी। हालांकि, अब सवाल यह है कि मामला सामने आने के बाद विभाग छात्राओं की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कब शुरू करता है और आरोप सही पाए जाने पर क्या कार्रवाई की जाती है।
फिलहाल छात्राओं के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में विभागीय जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

पीड़ित छात्र की मां

बड़ा सवाल
आजादी के 80 साल बाद भी यदि आदिवासी छात्राओं को अपनी मूलभूत समस्याओं और कथित प्रताड़ना की शिकायत लेकर पुलिस चौकी तक जाना पड़े, तो जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
जनजातीय कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की निष्पक्ष जांच कर छात्राओं की सुरक्षा, शिक्षा और छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी होगी।