शिक्षा के मंदिर में ‘नशे’ की एंट्री! आदिवासी आश्रम में बच्चों तक पहुंचा गुटखा, चपरासी पर गंभीर आरोप..!
सिर्फ स्पष्टीकरण से चलेगा काम? आदिवासी बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ के आरोपों पर विभाग की कार्रवाई सवालों के घेरे में
छिंदवाड़ा/चौरई। जनजातीय कार्य विभाग के अधीन संचालित आदिवासी बालक आश्रम हरदुआ माल एक बार फिर गंभीर आरोपों के कारण चर्चा में है। इस बार मामला छोटे-छोटे आदिवासी बच्चों तक तंबाकू, गुटखा और पाउच पहुंचने का है। आरोप है कि आश्रम का एक चपरासी बच्चों के लिए बाहर से तंबाकू और गुटखा लाकर देता था, जिससे मासूम छात्र नशे की गिरफ्त में आने लगे।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि छात्रावास अधीक्षक ने स्वयं संबंधित चपरासी पर आरोप लगाए हैं। इसके बाद सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग ने चपरासी से स्पष्टीकरण तो मांग लिया, लेकिन अब तक किसी सख्त विभागीय कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर शिक्षा और संस्कार देने वाले आश्रम परिसर में तंबाकू और गुटखा पहुंच कैसे रहा है? यदि आरोप सही हैं, तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि आदिवासी बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल नोटिस या स्पष्टीकरण मांगने से ऐसे मामलों पर रोक नहीं लगेगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारियों पर कड़ी विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ यह भी जांच होनी चाहिए कि आश्रम परिसर में नशीले उत्पाद पहुंचने की जिम्मेदारी किसकी है।
अब सवाल यह है कि क्या विभाग इस मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी कागजी स्पष्टीकरण और औपचारिक जांच तक ही सीमित रह जाएगा?
(नोट: समाचार उपलब्ध आरोपों और विभागीय कार्रवाई की जानकारी पर आधारित है। आरोपों की अंतिम पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही होगी।)








