हर्रई ब्लॉक के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बटकाखापा स्कूल के प्राचार्य से तीन दिन में मांगा स्पष्टीकरण..!
प्राचार्य ने बिना निविदा, टेंडर एवं कोटेशन के सामग्री की खरीदी ,फर्जी ब्लॉक से हुआ लाखों का भुगतान..?
छिंदवाड़ा (हर्रई) शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बटकाखापा के प्राचार्य पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। मामले में सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग छिंदवाड़ा सत्येंद्र सिंह मरकाम ने प्राचार्य से तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार विद्यालय में विभिन्न कार्यों के भुगतान, सामग्री क्रय, अतिथि शिक्षक भुगतान सहित अन्य मामलों को लेकर शिकायतें प्राप्त हुई थीं। शिकायतों में आरोप लगाए गए हैं कि कुछ भुगतानों में नियमों का पालन नहीं किया गया तथा बिल-वाउचर संबंधी अनियमितताएं हुई हैं। इसके अलावा प्रवेश शुल्क एवं अन्य वित्तीय मामलों को लेकर भी शिकायतें की गई हैं।

बड़ा सवाल..!
जनजाति कार्य विभाग इन दोनों आंखें बंद कर बैठा हुआ है यदि किसी की शिकायत होती है तभी उनकी जांच होती है विभाग में बैठे अधिकारी कर्मचारी सिर्फ इन दिनों कमाई में लगें हुए , जबकि जनजाति कार्यवाहक द्वारा इन स्कूलों की निगरानी के लिए बाकायदा सहायक संचालक की नियुक्ति हुई है, लेकिन सहायक सचालक शिक्षा भी जिला मुख्यालय के सहायक आयुक्त कार्यालय में बैठकर अपनी नौकरी कर रहे हैं , कभी भी सहायक संचालक (शिक्षा) इन स्कूल का निरीक्षण नहीं करते हैं, विकासखंड शिक्षा अधिकारी भी अपने ऑफिस में बैठकर कर नौकरी करते नजर आ रहे हैं ,कभी भी इन स्कूलों का निरीक्षण नहीं करें है , सबसे बड़ा सवाल की शिकायत करने वाले बता रहे हैं कि स्कूलों में गबन हुआ है तो फिर विभाग के अधिकारी कर्मचारी क्या कर रहें हैं!
शिकायत होने पर जागते हैं जनजाति कार्य विभाग के सहायक आयुक्त..?
शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग द्वारा प्राचार्य को नोटिस जारी कर आरोपों के संबंध में तथ्यात्मक जवाब मांगा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा में जवाब प्राप्त होने के बाद मामले की जांच एवं आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।
इधर जनजाति कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित आश्रम शालाओं एवं छात्रावासों में मरम्मत कार्यों को लेकर भी लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। स्थानीय स्तर पर लोगों का आरोप है कि कई स्थानों पर मरम्मत और पुताई जैसे कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इन मामलों में भी जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्राचार्य द्वारा दिए जाने वाले स्पष्टीकरण के बाद विभाग क्या निर्णय लेता है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो क्या कार्रवाई की जाती है।








